कार्तिक पूर्णिमा : जब चांदनी नहीं, आस्था बरसती है…

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Kohramlive : यह वही रात है जब चांदनी की हर किरण भक्ति का रूप ले लेती है। धरती पर दीपों की पंक्तियां ऐसे जलती हैं मानो खुद गंगा ने उजाले की चूनर ओढ़ ली हो। हर लहर पर श्रद्धा तैरती है और हर दीप में एक प्रार्थना झिलमिलाती है, “हे प्रभु, मन के अंधकार को मिटा दे।” कहते हैं, इस दिन अगर एक दीप भी सच्चे मन से जलाया जाये,
तो जीवन के सारे कलुष, सारी थकान, सारी कड़वाहट बह जाती है। यह वह क्षण है जब गंगा की धारा में आत्मा का स्नान होता है और इंसान फिर से अपने भीतर के प्रकाश को पहचानता है। इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा 4 नवंबर की रात 10.35 बजे से शुरू होकर 5 नवंबर शाम 6.49 बजे तक रहेगी। सबसे खास बात यह कि भद्रा का साया नहीं पड़ेगा, यानी हर शुभ कर्म का पूर्ण फल मिलेगा। स्नान और दान का शुभ मुहूर्त सुबह 4.51 से 5.44 बजे तक रहेगा।

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