Kohramlive : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिये तीन सदस्यीय समिति बनाई। समिति में सुप्रीम कोर्ट जज अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट चीफ जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और वरिष्ठ वकील बी. वी. आचार्य शामिल हैं। बीते 21 जुलाई को 146 सांसदों ने जज यशवंत वर्मा को हटाने का प्रस्ताव दिया, जिनमें भाजपा के रवि शंकर प्रसाद और कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी शामिल थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अगर संसद हटाती है तो पेंशन और अन्य लाभ नहीं मिलेंगे। बचने का एकमात्र रास्ता पहले इस्तीफा है। संविधान का अनुच्छेद 217 के तहत जज अपने हस्ताक्षर से सीधे इस्तीफा दे सकते हैं, मंजूरी की जरूरत नहीं। यहां याद दिला दें कि जज के घर में मार्च में आग लगी थी, जली हुई नकदी के बंडल मिले। तब वर्मा ने कहा मीडिया से कहा था कि नकदी की जानकारी नहीं। सुप्रीम कोर्ट समिति की रिपोर्ट और गवाहों के बयान के बाद उन्हें दोषी पाया गया। इसके बाद उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में भेजा गया, पर कोई न्यायिक काम नहीं मिला। गौरतलब है कि पहला महाभियोग नये संसद भवन में होगा। इससे पहले जज वी. रामास्वामी और जज सौमित्र सेन इस्तीफा दे चुके थे, लेकिन वर्मा का केस अलग—अगर चलेगा, तो नया संसद भवन में पहला महाभियोग होगा।
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