Ranchi : झारखंड फिर एक बार दहशत की दहलीज पर खड़ा है। माओवादियों ने 3 अगस्त को झारखंड समेत पांच राज्यों बिहार, छत्तीसगढ़, असम और बंगाल में बंद का ऐलान किया है और इसके साथ ही जंगल की खामोशी में कोई बड़ी हलचल छुपी हुई लग रही है। टॉप कमांडर बसवा राज और विवेक की मौत को “शहादत” बता कर माओवादी बंदी के दिन को स्मृति दिवस में बदलना चाहते हैं। लेकिन पुलिस को शक है—ये मातम की आड़ में बगावत की एक नई पटकथा रची जा रही है।
राज्य पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को सख्त अलर्ट पर रख दिया है। आशंका है कि इस दिन सुरक्षा बलों की चौकियों, पेट्रोलिंग टीम, VVIP काफिले तक को निशाना बनाया जा सकता है। खासकर ग्रामीण बाजार, रेलवे ट्रैक और पुलों को लेकर खतरे की घंटी बज चुकी है। आईजी अभियान की चेतावनी साफ है, हर जवान रहे तैयार, हर कैंप हो चौकस! रास्तों पर बिछाये जायेंगे माइन डिटेक्टर, और ऑपरेशनल मूवमेंट के सिवा कोई हिल-डुल नहीं। इधर, खुफिया तंत्र की आंखें जंगल के हर पत्ते पर टिकी हैं।








