spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

जयनाथ को रांची के सिपाही राधे ने बनाया था नामी गुंडा… देखें कैसे

Date:

spot_img
spot_img
📖भाषा चुनें और खबर सुनें:
🎙️कोहराम LIVE रेडियो

Ranchi (Neeraj Thakur) : एक से बढ़कर एक आतंक की गाथा लिखने वाला सम्राट गिरोह का सुप्रीमो जयनाथ साहू चुपके से रांची सिविल कोर्ट में सरेंडर कर गया। इसकी भनक किसी को नहीं लगी। ना पुलिस को और ना ही मीडिया को। एक दिन बाद तब पता चला जब जयनाथ साहू ने खुद चाहा। उसने मीडिया से कहा… सीधा-साधा जीवन जीने की चाह में उसने अपराध जगत से नाता तोड़ लिया। रांची, खूंटी, सिमडेगा और गुमला के कई थानों में उसके आतंक के कई गाथे अंकित है। बीते कुछ सालों से वह रांची छोड़ कोलकाता में जाकर बस गया। सुप्रीमो जयनाथ आज की तारीख में कई फ्लैट, जेसीबी और लग्जरी गाड़ियों का मालिक है। उसके नाम का आतंक ऐसा है कि उसके खिलाफ गवाही देने तक की हिम्मत किसी में नहीं। कुछ इलाकों में आज भी लोग उसके नाम सुन कांप उठते हैं। कई जाबांज IPS उसके पीछे पड़े, पर कोई उसका बाल बांका तक नहीं कर सके। कहते हैं कि परिवार के सदस्यों के कहने पर उसने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। वह अपने घुटने के दर्द से भी परेशान था। कभी गांव में बकरी भैंस चराने वाले सीधा साधा जयनाथ साहू को नामी गुंडा बनाने और चमकाने में रांची जिला बल का एक बर्खास्त सिपाही राधे सिंह का बड़ा योगदान है। जेल में बंद सिपाही राधे ने ही उसके कान में ऐसी फूंक मारी कि जेल के अंदर पंजाब भंसा यानी कैंटिन चलाने वाला जयनाथ देखते ही देखते सम्राट गिरोह का सुप्रीमो बन गया। यह बात करीब ढाई दशक पुरानी है।

दबंग बली साहू का माना जाता था सबसे वफादार और राइट हैंड 

तब कद काठी से तगड़ा और मजबूत जयनाथ साहू किसी मामले में रांची सेंट्रल जेल में बंद था। तब वह दबंग बली साहू का सबसे वफादार और राइट हैंड माना जाता था। जंगली जीवन जीने वाले जयनाथ को तब किसी का कोई डर भय नहीं था। उसके नाम का रांची और खूंटी में आतंक था। उसकी हुकूमत चलती थी। जेल आने के बाद उसकी माली हालत खराब हो गई। खर्चा-पानी तक का पैसा नहीं था। तब जेल में ही बंद रांची जिला बल के सिपाही राधे सिंह को उसने अपना गुरू बनाया। सिपाही राधे ने ही उसे गुरूमंत्र दिया। तब जयनाथ के कान में फूंक मारी गई कि तुम कद काठी से मजबूत और तगड़ा हो, केवल तेरा दिमाग भोथर है। दिमाग की बत्ती जलाओ और अपना अलग गैंग बनाओ। जैसा हथियार और जितना आदमी चाहोगे, वह मिल जायेगा। यह सुनते ही जयनाथ का मन बदल गया। तब जेल में ही बंद उसने अपने आका बली साहू से अदावत ले ली। अपने कूवत पर जेल के अंदर ही पंजाब भंसा हासिल कर लिया। पंजाबी भंसा यानी कैंटिन का ठेका लेने वाले जयनाथ साहू ने लंबे समय तक कैंटिन चलाया। उसके कैंटिन में मालदार कैदी ही खाना खाया करते थे। वहीं जेल के जीटी भंसा में सामान्य और कमजोर कैदियों को खाना नसीब होता था। जेल के अंदर ही गुरू चेला यानी बली और जयनाथ में जानी दुश्मनी हो गई।

जेल से बाहर आते ही तैयार कर लिया अपना अलग गैंग

जेल से बाहर आते ही जयनाथ ने अपना अलग गैंग तैयार कर लिया। तब दागी सिपाही राधे सिंह ने उसका खूब साथ दिया। उसे एक से बढ़कर एक हथियार और शूटर दिये। जहानाबाद से आये शूटरों में नेपाली सिंह और अनिल मल्लाह के हथियारों के नाल से कई खून बहे। ताबड़तोड़ कई वारदातों को अंजाम देने में जयनाथ साहू का नाम उछला। तब बली साहू के कुछ करीबी भी मारे गये। अपने नाम का अलग साम्राज्य कायम करने के बाद जयनाथ ने गांव देहात के जितने घरों में लाइसेंसी हथियार थे, उसे हासिल कर लिया। वहीं रांची के लापुंग, बेड़ो और कर्रा के छोटे बड़े केंदा और बीड़ी पत्ता के ठेकेदारों से बतौर रंगदारी मोटी रकम वसूलने लगा। मालदार हो जाने के बाद जयनाथ साहू का गैंग भी बड़ा होते चला गया।

पैसा और वर्चस्व के खेल में दिनेश गोप और जयनाथ साहू बन गये जानी दुश्मन

इसी बीच वर्ष 2000 में खूंटी का आतंक सुरेश गोप मारा गया। उसे तत्कालीन डीएसपी मधुसूदन बारी की टीम ने ढेर किया था। सुरेश का अंत होने के बाद उसका छोटा भाई दिनेश गोप ने JLT नाम का आपराधिक संगठन बनाया। JLT संगठन ने भी कई उम्दा हथियार जयनाथ साहू से खरीदे। बाद में पैसा और वर्चस्व के खेल में दिनेश गोप और जयनाथ साहू एक दूसरे के जानी दुश्मन बन गये। वहीं जयनाथ अपने पुराने आका बली साहू से बदला लेने के लिये तिलमिला रहा था। उसने रांची से दो पेशेवर शूटर वरूण सिंह और मुन्ना विश्वकर्मा को हायर किया। इन दोनों पेशेवर शूटरों को खूंटी में बली साहू को टपका देने की सुपारी दी गयी। दोनों खूंटी के एक लाइन होटल में खाने पीने लगे। इसी क्रम में दोनों के मुख से निकले शब्द किसी ने सुन लिया। यह बात बली साहू के लोगों तक पहुंच गई। दोनों शूटर मारे गये। वरूण कोकर में जिमखाना के पास रहता था, वहीं मुन्ना मधुकम में।

वहीं JLT का नाम बदल PLFI हो गया। इसके बाद दौर शुरू हुआ गैंगवार का। PLFI और सम्राट गिरोह के बीच हुए गैंगवार में करीब 39 लोग केवल रांची में मारे गये। हालत इतनी बिगड़ गई थी कि एक दफा सम्राट गिरोह ने दो लोगों की हत्या कर उसके डेड बॉडी को कर्रा थाना के बाहर फेंक दिया। हिमाकत ऐसी थी कि थानेदार को फोन कर कहा गया- डेड बॉडी फेंकी हुई है, उठा लो। खौफनाक माहौल था। लॉ एण्ड आॉडर दुरूस्त करने की मांग लेकर आम जनता को राजभवन के बाहर धरना देना पड़ा। रांची पुलिस कप्तान के पद पर जब IPS साकेत कुमार सिंह और रुरल एसपी असीम विक्रांत मिंज आये तो सम्राट गिरोह के खिलाफ जोरदार अभियान  शुरू किया। इससे पहले IPS एमएस भाटिया दोनों गिरोह के कई रीढ़ को तोड़ चुके थे। छोटे भाई जेठू साहू के मारे जाने के बाद से जयनाथ साहू अंडर ग्राउंड हो गया। उसके गिरोह के कई विकेट गिर चुके थे। बाद में पत्नी और साली की बात मान रांची छोड़ दिया और कोलकाता में जाकर बस गया।

जयनाथ साहू का आपराधिक इतिहास

01.लापुंग थाना कांड स0-52/1998, दिनांक 18.12.1998,धारा   302/307/34 भा0द0वि0 एवं 27/35 आर्म्स एक्ट
02.लापुंग थाना कांड स0-23/1999, दिनांक 31.05.1999,धारा 25(1-बी)/26/35 आर्म्स एक्ट
03.लापुंग थाना कांड स0-24/1999, दिनांक 31.05.1999,धारा-399/402 भा0द0वि0
04.लापुंग थाना कांड स0- 33/1999,दिनांक 23.07.1999, धारा-302/307/ 34 भा0द0वि0 ,27 आर्म्स एक्ट एवं 3/4/5 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम
05.लापुंग थाना कांड स0-06/2000, दिनांक 14.05.2000, धारा-307/364/34 भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट
06.लापुंग थाना कांड स0-10/2000, दिनांक 30.07.2000, धारा-384/386 भा0द0वि0
07.लापुंग थाना कांड स0- 02/2001, दिनांक 20.01.2001, धारा-395 भा0द0वि0
08.लापुंग थाना कांड स0- 09/2001,दिनांक 15.03.2001, धारा-341/323/385/386 भा0द0वि0
09लापुंग थाना कांड स0- 14/2001, दिनांक 06.04.2001, धारा-364/307/34 भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट
10.लापुंग थाना कांड स0-28/2001, दिनांक 21.06.2001, धारा-323/385/386/307/34 भा0द0वि0
11.लापुंग थाना कांड स0-30/2001,दिनांक 10.07.2001, धारा-302/34/120(b) भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट
12.लापुंग थाना कांड स0-36/2001, दिनांक 27.09.2001, धारा-307/353/34 भा0द0वि0 एवं 25 (1-b)a /27/35 आर्म्स एक्ट
13.लापुंग थाना कांड स0- 37/2001, दिनांक 30.10.2001, धारा-307/353/34 भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट
14.लापुंग थाना कांड स0- 45/2001, दिनांक 15.11.2001, धारा-364/34 /120(b)भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट
15.लापुंग थाना कांड स0- 45/2002, दिनांक 20.10.2002, धारा-302/34 भा0द0वि0
16.लापुंग थाना कांड स0- 59/2002, दिनांक 19.12.2002, धारा-364/34/302/201 भा0द0वि0
17.लापुंग थाना कांड स0- 01/2003, दिनांक 04.01.2003,धारा-302/201/34 भा0द0वि0
18.लापुंग थाना कांड स0-08/2003,दिनांक 11.02.2003, धारा-431/427/34 भा0द0वि0 एवं ¾ विस्फोटक अधि0
19.लापुंग थाना कांड स0-26/2003,दिनांक 23.08.2003, धारा –147/148/149/307 भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट
20.लापुंग थाना कांड स0- 11/2004, दिनांक 01.03.2004, धारा-414 भा0द0वि0 एवं 33/41/42 वन अधिनियम
21.लापुंग थाना कांड स0- 20/2004, दिनांक 09.05.2004, धारा-386/387/34 भा0द0वि0
22.लापुंग थाना कांड स0- 21/2004, दिनांक 09.05.2004, धारा-414 भा0द0वि0 एवं 25(1-B)A/26/35 आर्म्स एक्ट
23.लापुंग थाना कांड स0- 29/2004, दिनांक 07.06.2004, धारा-307/326/34 भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट
24.लापुंग थाना कांड स0-48/2004, दिनांक 27.09.2004, धारा-147/148/149/302 भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट
25.लापुंग थाना कांड स0- 54/2005, दिनांक 13.11.2005, धारा-

302/34 भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट

26.लापुंग थाना कांड स0- 14/2006, दिनांक 02.03.2006, धारा-323/324/307/302/34 भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट
27.लापुंग थाना कांड स0- 38/2007,दिनांक 14.07.2007, धारा-147/148/149/353/307/414 भा0द0वि0 एवं  27 आर्म्स एक्ट
28.लापुंग थाना कांड स0- 06/2008, दिनांक 31.03.2008, धारा-

302/120(b) भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट

29.लापुंग थाना कांड स0-11/2008, दिनांक 08.05.2008, धारा-

147/148/149/302/307/358 भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट

30.लापुंग थाना कांड स0- 18/2008, दिनांक 25.07.2008, धारा-

302/120(b) /34 भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट

31.लापुंग थाना कांड स0-19/2008, दिनांक 26.07.2008, धारा 147/148/149/353/307 भा0द0वि0 , 25(1-b)a/26/27/35 आर्म्स एक्ट एवं 13 UAPA Act
32.लापुंग थाना कांड स0- 31/2009, दिनांक 27.08.2009, धारा-

452/386/307/34 भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट

33.लापुंग थाना कांड स0- 15/2011, दिनांक 24.03.2011, धारा-

302/307/120(बी0) भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट

34.लापुंग थाना कांड स0- 13/2013, दिनांक 14.04.2013, धारा 414 भा0द0वि0 एवं 25(1-B)a/26/35 आर्म्स एक्ट।
35.कर्रा थाना कांड सं0 10/2001, दिनांक…………… धारा 326/307/34 भा0द0वि0
36.कर्रा थाना कांड सं0 32/2002, दिनांक…………….,धारा 147/148/149/342/302 भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट
37.कर्रा थाना कांड सं0 29/2003, दिनांक …………….धारा 302/120(b) भा0द0वि0
38.कर्रा थाना कांड सं0 29/2004,दिनांक …………, धारा 364/309/34 भा0द0वि0
39.कर्रा थाना कांड सं0 37/2004, दिनांक 25.07.2004, धारा 302/34/120 (b) भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट
40.कर्रा थाना कांड सं0 53/2004, दिनांक………., धारा 387/34 भा0द0वि0
41.कर्रा थाना कांड सं0 33/2005, दिनांक 09.05.2005, धारा 386/387/324 भा0द0वि0 एवं
42.कर्रा थाना कांड सं0 20/2006, दिनांक 27.04.2006, धारा 302/34/120(b) भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट
43.खूँटी थाना कांड सं0 26/2006, दिनांक 01.03.2006, धारा 302/307/ 120(b) /34  भा0द0वि एवं 27 आर्म्स एक्ट
44.मुरहु थाना कांड सं0 17/2000, दिनांक 23.03.2000, धारा 395 भा0द0वि0
45.कोतवाली थाना कांड सं0 474/1999, दिनांक…………., धारा 307/324/34 /120(b) भा0द0वि0 एवं 25(1-b)a/26 आर्म्स एक्ट
46.कमडारा थाना कांड सं0 26/1999, दिनांक 24.12.1999, धारा 394/302/34 भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट।

इसे भी पढ़ें : झारखंड के बच्चे अब पढ़ेंगे विदेशों में, हेमंत सरकार और FCDO के बीच हुआ MOU  

इसे भी पढ़ें : जेजे कॉलोनी में ताबड़तोड़ फायरिंग, दो लोगों की दर्दनाक मौत…देखें

spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT की जांच तेज, सनसनीखेज खुलासा…

Kohramlive :  रामनगरी अयोध्या एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा...

दोस्त की बीवी को पटाया और फिर 2 करोड़ की लालच में…

Kohramlive : कभी-कभी अपराध की कहानी किसी फिल्मी पटकथा...

रांची के 21 केंद्रों पर होगी NEET री-एग्जाम, निषेधाज्ञा लागू…

Ranchi :  राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित NEET...

इस बैंक के क्रेडिट कार्ड हुये महंगे, नये नियम… जानें

Kohramlive : अगर आपके बटुये में इंडसइंड बैंक का...