Kohramlive : देवों की धरती भारत में, जहां मौसम बदलते ही रसोई की खुशबू भी बदल जाती है, वहीं गुड़ हर घर की मिठास और सेहत दोनों का पहरेदार बन जाता है। वो गुड़, जो हमारे पुरखों की थाली में सदा रहा, अब फिर लौट आया है एक संजीवनी की तरह। गन्ने के रस से जन्मा ये सुनहरा अमृत जीवनदायी भी है। पुराने जमाने में जब चीनी नाम का कोई चलन न था, तब घर की छतों पर गुड़ सूखता था और दादी की हथेली में उसका एक टुकड़ा हर मर्ज की दवा बन जाता था।
शरीर को देता है सर्दी से बचाव की ढाल
सर्द हवाओं में जब हाथ-पैर सुन्न पड़ने लगें, तो गुड़ का छोटा-सा टुकड़ा भीतर आग सा जलाता है। यह शरीर को गर्म रखता है और ठंड की मार से बचाता है। वहीं, गुड़ में मौजूद आयरन और मिनरल्स शरीर को नई ऊर्जा देते हैं। रोजाना इसका सेवन करने से खून की कमी दूर होती है और चेहरे पर आने लगता है प्राकृतिक नूर जैसे सर्दी की सुबह पर ओस की चमक। भोजन के बाद एक टुकड़ा गुड़, दादी-नानी की सीख थी, क्योंकि यह पाचन को दुरुस्त करता है। पेट की भारीपन, गैस या कब्ज से राहत के लिये यह किसी औषधि से कम नहीं। गुड़ में छिपे एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं। सर्दी-जुकाम से बचाव के लिये यह सस्ता, सरल और असरदार उपाय है। कहते हैं, जब खून साफ होता है, तो चेहरा खुद-ब-खुद खिल उठता है। गुड़ यही काम करता है, पिंपल्स को दूर कर त्वचा को निखारता है और बालों को भी मजबूत बनाता है।






