Ranchi (Pawan Thakur/Bhavna Thakur) : 75 लाख का इंश्योरेंस करा अपने दूसरे पति राकेश रंजन को ठिकाने लगा देने के इल्जाम में आज उसकी बीवी प्रीति रंजन को अरगोड़ा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। मरने से ठीक एक दिन पहले यानी 20 मार्च को राकेश रंजन ने अपनी पहली बीवी रेखा रंजन और बेटा रॉनित रंजन को फोन किया था। यह फोन 20 मार्च की देर रात 2 बजकर 22 मिनट पर किया गया था। तब डरे-सहमे राकेश रंजन ने अपने परिवार से कहा था कि उनकी जान खतरे में है। उसके साथ कभी भी कुछ हो सकता है। दूसरे ही दिन यानी 21 मार्च यह मनहूस खबर आई कि राकेश रंजन की अपार्टमेंट के तीसरे तल्ले से गिर जाने से मौत हो गई। वहीं, उनके बेटे रॉनित और बेटी रिया का दावा था कि उसके पापा कभी खुदकुशी नहीं कर सकते। वह इतने कमजोर भी नहीं थे। वह हालातों से लड़ना और निपटना जानते थे। प्रीति रंजन पर हत्या करने का इल्जाम लगाया गया था। इस कांड के अनुसंधान में जुटे अरगोड़ा के थानेदार विनोद कुमार ने प्रीति के खिलाफ कुछ परिस्थितिजन्य साक्ष्य और सबूत जुटा लिये। तेज तर्रार माने जाने वाले थानेदार विनोद कुमार ठोस सबूत मिलते ही आज दिवंगत दवा कारोबारी राकेश रंजन की दूसरी बीवी प्रीति को गिरफ्तार कर लिया। वह घटना के बाद से जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के हवाई नगर में जाकर रहने लगी थी। वहीं मारे गये राकेश रंजन अरगोड़ा थाना क्षेत्र के पुंदाग रोड स्थित मंगलम इनक्लेव F3-B में रहते थे। राकेश रंजन की मां लगातार रांची पुलिस के आला अधिकारियों के संपर्क में थी। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि दोषी को नहीं बख्शा जायेगा। (Rakesh Ranjan Murder Case)
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मारे गये दवा कारोबारी राकेश रंजन के बेटा रॉनित और बेटी रिया ने घटना के वक्त “कोहरामलाइव” को बताया था कि पापा और हमलोगों की जिंदगी तब तबाह हो गई, जब उनके लाइफ में प्रीति की इंट्री हुई। तब रांची वाले घर में दादा-दादी, मम्मी और हमदोनों भाई-बहन रहते थे। दूसरी मम्मी बनकर घर में इंट्री करने वाली प्रीति तब अपने साथ दो बेटों को भी लेकर आई थी। बड़ा बेटा अंकित शुभम और छोटा बेटा आदित्य शुभम साथ-साथ रहने लगे। अंकित और शुभम के पिता जूनियर इंजीनियर सुनील कुमार हैं। वह हजारीबाग के हैं। वर्ष 2007 में प्रीति अपने पति सुनील को छोड़कर भाग गई थी। उनके अनेक किस्से हैं। उनके कुछ बड़े नेताओं से गहरे ताल्लुकात भी हैं। उनकी रोज नई-नई कहानी सामने आते रहती थी। घर में इंट्री करते ही प्रीति रंजन अपना गुल खिलाना शुरू कर दी थी। हम परिवार वालों पर जुल्मों सितम ढाना शुरू कर दी। तंग आकर दादा-दादी घर छोड़ अलग रहने लगे। पापा राकेश रंजन को प्रीति ने इस कदर अपने हुस्न के जाल में फंसा लिया था कि उन्हें कुछ और दिखता ही नहीं था। भाई-बहन को खूब सताया गया। मारा-पीटा गया। उन्हें भी घर से निकल जाने पर मजबूर कर दिया गया। घर को घर रहने नहीं दिया गया। पूरे घर को तबाह और बर्बाद कर दिया। पूरी प्रॉपर्टी अपने नाम करा ली। करीब 6 माह पहले पापा के नाम एक लिफाफा पटना स्थित घर में आया। लिफाफा खोला तो देखा पापा के नाम 75 लाख का इंश्योरेंस कराया गया है। नॉमिनी में सबसे पहले प्रीति रंजन, उनके बेटे अंकित और आदित्य शुभम का नाम लिखा हुआ था। हमलोगों में से किसी के नाम का जिक्र नहीं था। रिया ने कहा कि तब उसने अपने पापा से फोन किया। पापा एक कुरियर आया है। तब पापा ने कहा- उसे खोलना मत, ज्यों का त्यों ड्रावर में रख दो। हम आकर ले जाएंगे। किसी भी हालत में उसे खोलना मत। रिया और उसके भाई रॉनित का इल्जाम है कि उसके पापा का प्लांटेड मर्डर किया गया था।
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