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क्‍लाइमेट चेंज के मामले में बाइडेन से सहमत नहीं इंडियन PM मोदी, जानें कारण

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koharmlive desk : क्‍लाइमेट चेंज के खतरों से निपटने के लिए अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन तत्‍पर हैं। इस संबंध में जिन प्रमुख देशों के प्रमुखों को वर्चुअल समिट में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है, उनमें इंडियन पीएम नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं। इस कंटेक्‍स्‍ट में क्लाइमेट दूत जॉन केरी तीन दिन की भारत यात्रा पर रहे। जॉन केरी की यात्रा का फौरी मकसद यह है कि बाइडेन के क्लाइमेंट लीडर समिट से पहले इसमें भाग लेने वाले देशों के साथ बातचीत करना है। अमेरिका वैश्विक जलवायु परिवर्तन से निपटने की मुहिम का नेतृत्व फिर से हासिल करने के प्रयास में है। उसका मकसद है कि 2050 तक कार्बन उत्सर्जन को नेट जीरो यानी नगण्य कर दिया जाए।

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क्या है भारत की आपत्ति 

इंडिया अभी नेट-जीरो एमिशन का विरोध कर रहा है, क्योंकि उसे इससे सबसे अधिक प्रभावित होने की संभावना है। भारत की स्थिति अद्वितीय है। अगले दो से तीन दशकों में भारत का उत्सर्जन दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ने की संभावना है, उसे अपनी विकास दर को तेज करना है, ताकि सैकड़ों करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला जा सके। जंगल बढ़ाने या कोई अन्य उपाय करने से उत्सर्जन की भरपाई नहीं की जा सकती है। अभी कार्बन हटाने वाली अधिकांश तकनीकें या तो अविश्वसनीय हैं या बहुत महंगी हैं।

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इस साल से लागू होना होना है पेरिस समझौता

गौरतलब है कि पेरिस समझौता इस साल से लागू होना है, ताकि 2050 तक एमिशन कम करने के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। लेकिन, भारत बार-बार इस बात की ओर भी इशारा करता रहा है कि विकसित राष्ट्र अपने पुराने वादों और प्रतिबद्धताओं पर कभी खरे नहीं उतरे हैं। किसी भी प्रमुख देश ने क्योटो प्रोटोकॉल के तहत उन्हें सौंपे गए उत्सर्जन में कटौती के लक्ष्य को हासिल नहीं किया है।

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