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आधी रात गूंजा ‘जय कन्हैया लाल की’, जन्मे नंदलाल…

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Kohramlive : भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी की वह पावन रात, घड़ी की सुई जैसे ही मध्यरात्रि की ओर बढ़ी, मंदिरों में घंटियां गूंज उठीं और चारों ओर एक ही स्वर सुनाई देने लगा, ‘जय कन्हैया लाल की, हाथी घोड़ा पालकी…’ देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव पूरे उल्लास और भक्ति के साथ मनाया गया। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की धूम है। श्रद्धालु भजन-कीर्तन में झूम रहे हैं और कान्हा के जन्म की खुशी में आरती कर रहे हैं।

मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़

मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि 12 बजे हुआ था। इसी स्मृति में जन्माष्टमी पर देशभर में भव्य आयोजन किये जाते हैं। इस बार भी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नजर आई। कहीं ढोल-मंजीरे बज रहे हैं तो कहीं भक्त कान्हा के भजनों पर झूम रहे हैं। जन्म के साथ ही मंदिरों में आरती और विशेष पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया। जन्मोत्सव के मौके पर भगवान श्रीकृष्ण के विग्रह का दूध, दही, घी और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक किया गया। जन्म के बाद मंदिरों में बाल गोपाल को नये वस्त्र और आभूषण पहनाकर उनका श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद आरती कर भक्तों के बीच प्रसाद वितरित किया जाता है।

45 मिनट का रहा शुभ मुहूर्त, रात 11:57 से 12:42 तक

जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिये रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक शुभ मुहूर्त बताया गया है। यानी कान्हा की विशेष पूजा के लिये कुल 45 मिनट का समय शुभ रहा।  श्रद्धालु इस दौरान विधि-विधान से बाल गोपाल की पूजा कर उनका आशीर्वाद लेने की कामना करते हैं। कृष्ण जन्मोत्सव से जुड़ी कई परंपराएं आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जाती हैं। इन्हीं में एक है ‘नाल छेदन’ की रस्म। परंपरा के अनुसार जन्म के समय खीरे के डंठल को सिक्के से काटा जाता है। इसे प्रतीकात्मक रूप से भगवान श्रीकृष्ण की नाल छेदन की रस्म माना जाता है। मध्यरात्रि 12 बजे जन्म के साथ ही यह परंपरा निभाई जाती है।

मंदिरों में आधी रात तक भक्ति की लहर

कान्हा के जन्म के साथ ही मंदिरों में उल्लास चरम पर पहुंच गया। घंटियों की आवाज, शंखनाद, आरती और भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आये। कहीं कान्हा पालने में झूले, कहीं माखन का भोग लगा और कहीं भक्तों की आंखों में अपने लड्डू गोपाल के दर्शन की चमक दिखाई दी। आज की रात कान्हा के जन्म की खुशी में डूबे करोड़ों भक्तों के लिये आस्था, प्रेम और उल्लास की रात रही।

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