Hazaribagh(Sunil Sahu) : राजधानी रांची के कई ईट भट्ठों और फैक्ट्रियों की चिमनियों से हजारीबाग के कोयले से धुंआ निकलता है। वहां से कोयला रातों-रात रांची के बुढ़मू तक के जंगलों में डंप हो जाता है। कई बार रांची और हजारीबाग पुलिस ने इन कोयला तस्करों को दबोचा भी है। कुछ तस्कर ऐसे भी है जो फर्जी कागजात तक तैयार कर लेते हैं, ताकि राह में रोकने-टोकने या धरे जाने पर कानून के पहरेदारों के आंखों में धूल झोंका जा सके। पुलिस भी पहली नजर में फर्जी कागजातों को नहीं पकड़ पाती। कोयला माफियाओं का नेटवर्क इतना तगड़ा है कि पुलिस के एक्टिव मोड में आने से पहले ही उनके तक सूचना पहुंच जाती है। कोयला तस्करों को करीब से जाने वाले एक सूत्र का कहना है कि हजारीबाग के बड़कागांव के कई जंगलों में रात के अंधेरे में अवैध कोयले को जमा किया जाता है। इस बात का खुलासा कुछ दिन पहले तब हुआ था जब वन विभाग की एक टीम जंगल में घुसी थी। जंगलों में डंप करने के बाद रातों-रात कोयला बड़ी गाड़ियों से रांची की राह पकड़ लेता है। ज्यादातर कोयला ईट भट्ठों और फैक्ट्रियों में खपाये जाते हैं। एक पुलिस अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इस खेल में चार लोग बेहद एक्टिव हैं। ये चारों चेंलगदाह चुरुगढ़ा इलाके के रहनेवाले हैं। इनके नाम भी जगजाहिर हैं, पर पुलिस के एक्टिव होते ही सभी अंडरग्राउंड हो जाते हैं। इसमें गंझू, मरांडी, लकड़ा और राजू बेखौफ है। इनके ताल्लुकात ऐसे लोगों के साथ है कि उनके मन में डर-भय नहीं।
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