TRENDING : कोरोना महामारी की दूसरी वेव से अभी पूरा देश जूझ रहा है। इसके अतिरिक्त भी सरकार और नागरिकों के लिए एक बड़ी चुनौती सामने खड़ी है। ये चुनौती है कोविड-19 से जुड़े कचरे की। कोरोना की दूसरी लहर से ना केवल देश में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है, बल्कि बायोमेडिकल कचरे में भी जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है।
Read More :अलग-अलग हादसों में गई 5 लोगों की जान, 6 गंभीर रूप से जख्मी
बायोमेडिकल कचरे के डिस्पोजल का सही मैनेजमेंट जरूरी
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक, बायोमेडिकल वेस्ट यानी वो कचरा जो किसी भी इंसान या जानवर के इलाज के दौरान या किसी शोध की गतिविधि के दौरान अस्पताल में इकट्ठा होता है। बायोमेडिकल कचरे का सही मैनेजमेंट इंफेक्शन को फैलने से रोकता है और कोरोना काल में ये और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। बायोमेडिकल कचरे में कैप्स, मास्क, प्लेसेंटा, पैथोलॉजिकल कचरा, प्लास्टर ऑफ पेरिस, ऑपरेट करने के बाद निकाले गए अंग, एक्सपायर हो चुकी दवाएं, रेडियोएक्टिव कचरा, ग्लव्ज, ब्लड बैग, डायलिसिस किट्स, आईवी सेट्स, यूरिन बैग्स, केमिकल कचरा जैसी कई चीजें शामिल है। साइंटिफिक तरीके से डिस्पोज ना करने पर ये पर्यावरण के साथ ही इंसानों के लिए भी खतरनाक हो सकता है।
Read More :ठनका गिरने से एक की मौत, 4 गंभीर
कोविड कचरे को डिस्पोज करने की बनी है गाइडलाइन
गौरतलब है कि भारत के सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड(CPCB) ने देशभर में कोविड कचरे को डिस्पोज करने के लिए गाइडलाइंस बनाई हैं। कोरोना मरीजों के क्वारनटीन, जांच और इलाज के दौरान पैदा हुए कचरे को इन्हीं गाइडलाइंस के तहत डिस्पोज किया जाना है। CPCB के मुताबिक, फिलहाल भारत में 198 कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी (CBWTFs) कोविड कचरे को डिस्पोज करने में लगी हैं।
रोजाना 203 टन कोविड कचरा का हो रहा उत्पादन
पिछले साल ‘COVID19BWM’ नाम का एप भी तैयार किया गया था इसके जरिये कोविड वेस्ट की ट्रैकिंग की जाती है। बायोमेडिकल वेस्ट जनरेटर और कॉमन फैसिलिटी ऑपरेटर को हर दिन डेटा जमा करना होता है। 10 मई 2021 तक के आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में रोज औसतन 203 टन कोविड कचरे का उत्पादन हो रहा है। पिछले साल किसी एक दिन में सबसे अधिक 220 टन कोविड कचरा निकला था। सरकार की मौजूदा गाइडलाइंस के हिसाब से जहां भी बायोमेडिकल कचरे को डिस्पोज करने के लिए कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी (CBWTF) की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां के प्रशासन और हेल्थकेयर सर्विस को इमरजेंसी डिस्पोजल फैसिलिटी स्थापित करनी चाहिए।
Read More :सदर अस्पताल रांची की बड़ी उपलब्धि, मिला लक्ष्य सर्टिफिकेशन
सफाई कर्मचारी बरतें अतिरिक्त सतर्कता
विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड महामारी की वजह से सफाई कर्मचारियों को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 50 लाख सैनिटाइजेशन वर्कर्स हैं जिनमें से 50 प्रतिशत महिलाएं हैं। ये वर्कर्स हाशिए पर रहने वाला समुदाय है और ट्रेनिंग और जागरूकता के अभाव में इन लोगों में इंफेक्शन का खतरा कहीं ज्यादा है। इसके अलावा कई गांवों-शहरों में डोर टू डोर कचरा ना उठाने की सुविधा ने भी इंफेक्शन के खतरे को बढ़ाया है।
तीन तरह के बैगों का करना है इस्तेमाल
सरकार के नियमों के मुताबिक, बायोमेडिकल कचरे को तीन तरह के बैगों में कलेक्ट किया जाना है। इनमें यैलो बैग(जलाए जाने वाला कचरा), रेड बैग(रिसाइकिल होने वाला कचरा) और व्हाइट बैग(नुकीले और कांच से जुड़ा कचरा) शामिल है बायोमेडिकल कचरे के अलावा कोविड-19 ने देश में प्लास्टिक की खपत को भी बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। साल 2019 में केंद्र सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक को व्यवस्थित तरीके से खत्म करने की योजना पर काम शुरू कर दिया था लेकिन कोविड-19 की आपदा ने अब तक की प्रोग्रेस को नकारात्मक तौर पर प्रभावित करने का काम किया है।
Read More :झारखंड की युवती का आर्मी जवान ने किया यौन शोषण, मारपीट कर…












