Kohramlive : बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में दिक्कत, खांसी और खराब गला, दस्त, उल्टी, मांसपेशियों में दर्द और बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होने लगे तो अलर्ट मोड में आ जाये। इस वायरस के संपर्क में आने के 4 से 14 दिनों के अंदर लक्षण नजर आने शुरू हो जाते हैं। शुरुआत में पहले बुखार या सिरदर्द और बाद में खांसी और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं होती हैं। गंभीर मामलों में, यह वायरस दिमाग में संक्रमण की वजह बन सकता है, जैसे कन्फ्यूजन, बोलने में परेशानी, दौरे पड़ना, बेहोशी छाना, रेस्पिरेटरी संबंधी दिक्कत आ सकती है। इस वायरस की सबसे ज्यादा चिंता केरल में लोगों को सता रही है। केरल में इसे निपाह वायरस के नाम से जाना जा रहा है। निपाह वायरस बांग्लादेश और भारत में भी दस्तक दे चुका है। मलेशिया और सिंगापुर में 100 लोगों से ज्यादा मौत चौंका और डरा गई। बांग्लादेश, मलेशिया, सिंगापुर, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मेडागास्कर, फिलीपींस और थाईलैंड देश इस वायरस से चिंतित है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के हवाले से मीडिया में आई खबरों के मुताबिक निपाह वायरस, एक जानलेवा वायरस है, जो जानवरों से इंसानों में फैलता है। यही वजह है कि इसे जूनोटिक वायरस भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से फ्रूट बेट्स से फैलता है, जिसे उड़ने वाली लोमड़ी (flying fox) के नाम से भी जाता है। हालांकि, चमगादड़ के अलावा यह वायरस सूअर, बकरी, घोड़े, कुत्ते या बिल्ली जैसे अन्य जानवरों के जरिए भी फैल सकता है। यह वायरस आमतौर पर किसी संक्रमित जानवर के शारीरिक तरल पदार्थ जैसे खून, मल, पेशाब या लार के संपर्क में आने से फैलता है। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (CDC) के मुताबिक, निपाह वायरस के 40% से 75% मामलों में मृत्यु हो सकती है। निपाह वायरस संक्रमक है। यह लार, मल, पेशाब और खून जैसे शारीरिक तरल पदार्थों के जरिए फैल सकता है। इसका मतलब है कि अगर आप निपाह वायरस से पीड़ित किसी व्यक्ति की देखभाल कर रहे हैं, तो पीड़ित के खांसने या छींकने से आपको भी यह संक्रमण हो सकता है। यही वजह है कि यह वायरस वायुजनित यानी एयरबॉर्न भी है।
निपास वायरस का इलाज करने के लिए कोई वैक्सीन या दवा मौजूद नहीं है। ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रख इसके लक्षणों का असर कम किया जाता है, जैसे, बहुत सारा पानी पीना, भरपूर आराम करना, एसिटामिनोफेन या इबुप्रोफेन लेना (डॉक्टर की सलाह से ही लें), मतली या उल्टी के लिए दवाओं खाना, सांस लेने में दिक्कत होने पर इन्हेलर या नेब्युलाइज़र का इस्तेमाल और दौरे पड़ने पर एंटीसीजर दवाएं लेना।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की पुष्टि Kohramlive.com नहीं करता है। इनको केवल सुझाव के रूप में लें। इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।)
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