Kohramlive : तमिलनाडु के गुडलूर के थॉमस इंग्लिश हाई स्कूल के बच्चों के लिये आज का दिन खास बन गया, जब उनके बीच कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पहुंचे। बस, एक ऐसा संवाद, जिसमें स्कूल की शरारतें भी थीं और देश का भविष्य भी। छात्रों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी अपने स्कूल के दिनों में लौट गये। मुस्कुराते हुये बच्चों से बोले, “मैं हर दिन कोई न कोई शरारत जरूर करता था।” उन्होंने बताया कि बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते वक्त वे अपने माता-पिता को यह यकीन दिला देते थे कि वे खुश नहीं हैं, ताकि माता-पिता उनसे मिलने आ जायें। फिर हंसते हुये जोड़ दिया कि असल में मैं उदास नहीं रहता था, स्कूल में बहुत खुश था। इन किस्सों ने बच्चों को भी हंसा दिया और सोशल मीडिया पर भी ये बातें सुर्खियां बटोरने लगीं।
मस्ती के बीच राहुल गांधी ने छात्रों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आईटी और तकनीक जैसे विषयों पर भी चर्चा की। उन्होंने बच्चों को समझाया कि भविष्य की दुनिया तकनीक से बदलेगी, लेकिन सोच, संवेदना और सवाल करने की आदत हमेशा इंसान की सबसे बड़ी ताकत रहेगी। राहुल गांधी ने अपनी पसंदीदा शिक्षिका का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा मेरे स्कूल में रसायन विज्ञान की शिक्षिका मुझे बहुत पसंद थीं। वे पढ़ाने में शानदार थीं और परीक्षा की तैयारी में खूब मदद करती थीं। उनकी इस बात पर छात्रों के चेहरों पर अपने-अपने पसंदीदा टीचर की यादें तैर गईं।
“मेरे घर में दादी ही बॉस थीं”
एक छात्र के सवाल पर राहुल गांधी ने महिलाओं की भूमिका को लेकर दिल से बात कही। उन्होंने कहा कि मैं ऐसे परिवार में बड़ा हुआ, जहां मेरी दादी इंदिरा गांधी ही घर की मुखिया थीं। उन्होंने बताया कि उनकी दादी परिवार संभालती थीं। मुश्किल हालात में कड़े और सही फैसले लेती थीं। इसी माहौल ने उन्हें महिलाओं के नेतृत्व और ताकत को समझने का नजरिया दिया। राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं में नेतृत्व, समझ और साहस की कोई कमी नहीं, जरूरत है तो सिर्फ अवसर देने की, उनका मानना है कि अगर महिलाओं को आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले तो वे परिवार, समाज और देश तीनों को बेहतर दिशा दे सकती हैं। उन्होंने राजनीति, शिक्षा, तकनीक और रोजगार में
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।












