तेरी ही लिखावट हूं मां… देखें वीडियो || Mothers Day 2022

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Ranchi (Sanjay Kapardar/Nandani Singh) : यह हकीकत है, मां से बढ़कर कोई दौलत नहीं। देखता हूं हजारों चेहरे, पर मां का चेहरा कहीं नजर नहीं आता। मां की ममता मोहब्बत का तूफान है। अगर कोई मां देख नहीं सकती है तब भी सारा कुछ अपनी दिल की आंखों से देख लेती है। उसे किसी चश्मे की जरूरत नहीं पड़ती। अपने बच्चों को रोता देख अपना चैन सुकून भूल जाने वाली मां घर की जन्नत होती है। अपने मुंह का निवाला भी खिलाती है और लोरियां भी सुनाती है। मां की किस्मत में आराम और राहत नहीं। अपनी संतानों के दोनों गालों को चूमकर वो दुआएं हजार देती है, सारी बालाये ले जाती है। मां की गोद में अजीब सा सुकून है, उसकी बाहें खिलौने का बाजार है। मां की आंचल से बेहतर कोई छत नहीं। मां की ममता और करुणा सदा बरसती रहती है। औलाद चाहे कोई हो अगर वह नेक है तो सबसे ज्यादा सुकून मां को मिलता है। कभी उस शख्स से कोई उम्मीद मत रखना जो अपनी मां का नहीं हो सका, वह किसी का नहीं हो सकता। रिश्ते तो सारे काबिले-तारीफ है, मगर मां का प्यार सबसे जुदा है। वह मां ही है जो रात में किसी कारणवश रोटी खत्म हो जाए तो बोलती है, मुझे भूख नहीं है।

कोरोना काल में अपनी मां को खो देने वाले झारखंड के एक हस्ती प्रतुल नाथ शाहदेव सिर्फ इतना बोलते हैं… जबसे जमीं झुकायी है मां के कदमों में, मेरा नसीब दुआओं से बात करता है। याद आता है, वो बचपन, तेरी ममता, तेरे आंसू और तेरा दामन। जब कभी दुनिया मेरे दिल को दुखाती थी, तब तुम मुझे अपने आंचल में छुपा लेती थी। मैं हंसता तो वो भी हंसती थी, मैं रोता तो वो भी तड़पती थी। कोरोना क्या आया उसका साथ ही छूट गया। उसकी सांस क्या टूटी, मेरा दिल ही टूट गया। अब कहां कोई मेरा नाज़ उठाने वाला, नखरे सहने वाला। अब कहां कोई पलकों में बिठाने वाला, अपने हाथों से खिलाने वाला। जब रूठ जाऊ तो कोई मनाने वाला। जब दिन भर की थकान आती है, तब तेरी हाथों की वह नरमी बहुत याद आती है। चंडीगढ़ की खुशी कहती है जितना मैं कमा कर अपनी मां को सिक्का नहीं दे सकी, उतना वो मेरी नजरे उतारने में गंवा दी। उसकी बनाई ताबीज अब भी मेरी बाहों में है, उसकी दुआ मेरे साथ-साथ चलती है। रांची के शहीद डीएसपी यूसी झा की बेवा रंजना झा बोलती हैं… हौंसला हिम्मत जरूरी है क्यूंकि पत्थरों के सीने से रास्ते निकलते हैं। करुणा की छाव में पल रहे अनाथ बच्चों की मुंह बोली मां पिंकी, सुबु और पद्मिनी का कहना है कि इन्हें अपनी कोख से भले जन्म नहीं दिया, पर जब उन्हें एक दिन ना देखूं तो मन मचल उठा हैं। कल mother’s day है। भले बाकी दिन mothers day ना हो, पर हर रोज उनका मान, सम्मान और आदर करें।

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