UP : रोज की तरह खेत में गेहूं की बालियां हवा से लहरा रही थीं, बीते 21 अप्रैल की सुबह, देवरिया के पकड़ी छापर पटखौली गांव के खेतों में सिर्फ़ गेहूं नहीं, एक खौफनाक राज भी पक चुका था। जितेंद्र गिरी की पुतली तब हैरत से फैल गईं जब उन्होंने खेत के कोने में एक भारी ट्रॉली बैग देखा। बैग के करीब गया, तो दिल बैठ गया। पुलिस आई, डॉग स्क्वॉड दौड़ा, और जब बैग खुला तो देवरिया की धरती कांप उठी। वो कोई और नहीं, भटौली गांव का नौशाद अहमद था…जो कुछ दिन पहले ही दुबई से लौटकर अपनी बीवी और बच्चों के साथ खुश था। नौशाद इस बात से बेखबर था कि उसकी पत्नी के दिल में पहले से कोई और बस चुका है, और अब जो चल रही है वो मोहब्बत नहीं, एक खूनी साजिश है।
मोहब्बत की मर्जी, खून की साजिश
पुलिस जब भटौली पहुंची, तो नौशाद का घर खामोश था। बीवी की आंखों में आंसू थे, मगर उनमें न शोक था, न पछतावा। कुछ सवालों पर ही उसकी जबान लड़खड़ाई। और फिर टूट गईं सारी दीवारें, उसने कुबूल किया कि उसके प्रेमी के साथ मिलकर उसने ही अपने पति को मौत दी। एक रात पहले ही, बातों-बातों में प्रेमी ने सिर पर वार किया और बेहोश होते नौशाद को ट्रॉली बैग में भरकर गाड़ी में डाला गया। घर से 55 किलोमीटर दूर एक अनजान खेत में उसका शरीर फेंक दिया गया। जैसे कोई भूली-बिसरी चीज हो।
गांव में अब सिर्फ फुसफुसाहटें हैं, “कौन था वो आशिक?” “कब से चल रहा था ये चक्कर?” “क्या ये पहला खून था, या कुछ और भी छिपा है?” पुलिस की टीमें अब उस फरार प्रेमी की तलाश में छापेमारी कर रही हैं। हर टावर, हर कॉल डिटेल को खंगाला जा रहा है। और उधर गांव की लड़कियां, अब आंखों में डर लिये स्कूल जा रही हैं। माएं बेटियों को समझा रही हैं, कि मोहब्बत जब वफादारी छोड़ दे, तो सिर्फ लहू ही बहता है।




