Kohramlive: इस समय आसमान में कितने विमान उड़ान भर रहे हैं। अगर आपने ऐसा सोचा है तो यह बहुत ही व्यवहारिक और उचित सवाल है। क्या वाकई में इस सवाल का जवाब दिया जा सकता है? दरअसल, इस सवाल का सटीक जवाब दिया जा सकता है क्योंकि करीब-करीब हर विमान को ट्रैक किया जाता है कि वह किसी एक समय पर कहां है?
फ्लाइट ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर कंपनी फ्लाइटअवेयर ने 2017 में निर्धारित किया कि किसी भी एक समय आकाश में औसतन 9,728 कमर्शियल प्लेंस होते हैं। विमानों के लगातार उड़ान भरने और हवईअड्डों पर लैंड करने के कारण ये संख्या हर मिनट घटती या बढ़ती रहती है। कोरोना महामारी के दौरान एक समय में असामान में उड़ रहे विमानों की संख्या काफी कम हो गई थी। फ्लाइटअवेयर के डाटा के मुताबिक, कोरोना महामारी के बाद भी दुनियाभर में उड़ानों की संख्या में 10 से 20 फीसदी की कमी आई है।
एक समय में कितने विमान हवा में होंगे?
कमर्शियल पायलट और फ्लाइटअवेयर के प्रवक्ता कैथलीन बैंग्स कहते हैं कि महामारी के बाद 2021 व 2022 में हर दिन उड़ानों की संख्या में करीब 10,000 से 20,000 तक की कमी दर्ज की गई है। फ्लाइटअवेयर का अनुमान है कि इन दिनों किसी भी एक समय में औसतन 7,782 से 8,755 कमर्शियल प्लेन दुनियाभर के आसमान में होते हैं। बैंग्स के मुताबिक, मौसम भी एक समय में उड़ानों की संख्या में बड़ी भूमिका निभाता है। उनके मुताबिक, गर्मियों में ज्यादातर देशों की एयरलाइंस सबसे ज्यादा व्यस्त रहती हैं. दरअसल, गर्मियों में छुट्टियों के कारण लोग जमकर हवाई यात्राएं करते हैं।
कौन-से महीने होती हैं सबसे कम उड़ान?
बैंग्स के मुताबिक, साल के दौरान पड़ने वाली लंबी छुट्टियों और लंबे सप्ताहांत पर भी ज्यादा फ्लाइट्स आसमान में होती हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका में हर साल की जनवरी हवाई यात्रा के लिहाज से सबसे सुस्त महीना होता है। बता दें कि इन आंकड़ों में कार्गो, सैन्य और निजी जेट की उड़ानों को शामिल नहीं किया गया है. फ्लाइटअवेयर के मुताबिक, 2021 में सभी उड़ानों में कमर्शियल एविएशन की हिस्सेदारी केवल 46.4 फीसदी थी. इसलिए किसी भी समय हवा में विमानों की कुल संख्या दोगुनी हो सकती है। दूसरे शब्दों में कहें तो इनकी संख्या 15,500 से 17,500 के बीच कहीं हो सकती है।
एयरलाइंस कैसे ट्रैक करती हैं फ्लाइट्स?
ज्यादामर उड़ान-ट्रैकिंग कंपनियां फ्लाइट्स को ट्रैक करने के लिए स्वचालित आश्रित निगरानी-प्रसारण नाम की तकनीक का इस्तेमाल करती हैं। ज्यादातर विमान एडीएस-बी ट्रांसपोंडर से लैस हैं, जो स्वचालित रूप से हवाई यातायात नियंत्रकों को अपने स्थान, ऊंचाई और हवा की गति जैसे डाटा जारी करते रहते हैं। फ्लाइट ट्रैकिंग कंपनियां इस सार्वजनिक डेटा का इस्तेमाल अपने सिस्टम को जानकारी उपलब्ध करााने के लिए करती हैं। उदाहरण के लिए, फ्लाइटअवेयर के पास दुनिया भर में जमीन पर 34,000 एडीएस-बी रिसीवर का नेटवर्क है. साथ ही पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले उपग्रह रिसीवर भी हैं।
आप भी घर बैठे विमान कर सकते हैं ट्रैक
एयरलाइंस और एयरपोर्ट्स समेत कई विमानन कंपनियां उड़ानों की निगरानी के लिए फ्लाइटअवेयर का इस्तेमाल करती हैं। रेग्युलर फ्लायर्स भी इसके डाटा का फायदा उठा सकते हैं। एक अन्य लोकप्रिय विकल्प फ्लाइटराडार24 है। ट्रैकिंग कंपनियां डेस्कटॉप और मोबाइल ऐप के जरिये अपने सॉफ्टवेयर के फ्री व पेड संस्करण पेश करती हैं। इनमें उच्चस्तर की सेवा यूजर्स को ज्यादा डाटा उपलब्ध कराती है. फ्लाइटराडार24 में एक रियल्टी मोड भी होता है, जिसमें आप अपने कैमरे को ऊपर उड़ रहे विमान के सामने रख सकते हैं और एयरलाइन, उड़ान संख्या, ऊंचाई, ओरिजन और डेस्टीनेशन का पता लगा सकते है। अगर आपके पास आईफोन है तो आप आसपास के विमानों की पहचान भी कर सकते हैं।
क्या हाई-प्रोफाइल उड़ानों के लिए है खतरा?
बैंग्स कहते हैं कि हम दुनियाभर में कहीं भी उड़ानों को ट्रैक कर सकते हैं। इनमें समुद्र, बड़े रेगिस्तान और उत्तरी व दक्षिणी ध्रुव के ऊपर उड़ान भर रही फ्लाइट्स भी शामिल हैं। ये आपको हाई-प्रोफाइल फ्लाइट्स के लिए सिक्योरिटी रिस्क की तरह लग सकता है। बैंग्स के मुताबिक, कुछ सैन्य उड़ानों को हम ट्रैक नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा मशहूर हस्तियों, राजनेताओं के निजी विमान अपने टेल नंबर या विमान पंजीकरण को ब्लॉक करने के लिए भुगतान करते हैं. फ्लाइटअवेयर इसके बाद भी उन्हें ट्रैक कर सकती है, लेकिन उनका डाटा जारी नहीं करती है। कंपनी उनका डाटा फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन या नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड जैसी सरकारी एजेंसी के अनुरोध पर ही उपलब्ध कराती है।
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