- फर्स्ट ग्लांस में लग सकता है अजीब, पर हेल्थ के लिए दुनिया में लगातार हो रहे शोध
- खाना परोसने के लिए इस्तेमाल हो रहा प्लास्टिक सेहत के वास्ते खराब, बढ़ाता है प्रदूषण भी
- हेल्दी लाइफ स्टाइल को लेकर किए जा रहे तरह-तरह के जतन
- हैदराबाद के नारायण पीसपति ने मोटे अनाज के आटे से खाने में इस्तेमाल होनेवाला बनाया है चम्मच
कोहराम लाइव डेस्क : खाने के तरह-तरह के आइटम की चर्चा में खास मजा है, पर बात यदि खाने के सामानों के साथ कप, प्लेट और चम्मच के खाने की भी हो, तो फर्स्ट ग्लांस में थोड़ा ऑकवर्ड लगता है। यह तो अजीब बात है, कोई भी कहेगा कि यह कैसा जमाना आ गया गया है भाई कि आदमी अब बर्गर-नूडल्स के साथ कप-प्लेट और चम्मच भी खा सकता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं प्लास्टिक के बर्तन से निजात पाने के लिए नए विकल्प की खोज के प्रयास की। ऐसे बर्तन के प्रयोग की खोज जारी है,जिन्हें खाने के बाद फेंकने की जरूरत न हो।
इसे भी पढ़ें :Bio-Bubble में रहना और टिकना आसान नहीं : सुनील छेत्री
चम्मच भी भोजन का हिस्सा
आज के दौर में दुनिया के सामने लोगों की हेल्दी लाइफ स्टाइल को लेकर बड़ी चुनौती है। फूड प्रोडक्ट्स व खाना परोसने के लिए इस्तेमाल हो रहा प्लास्टिक न सिर्फ हेल्थ के लिहाजा से खराब हैं, बल्कि दुनिया भर में इससे प्रदूषण भी बढ़ रहा है। प्लास्टिक न गलता है, न जलता है। यदि इसे जलाया जाता है, तो इससे निकलने वाला धुआं सेहत के लिए ठीक नहीं होता है। इसी बात को ध्यान में रखकर दुनिया में प्लास्टिक से निजात पाने के लिए शोध किए जा रहे हैं। इसमें काफी हद तक वैज्ञानिकों को सफलता भी मिली है। प्लास्टिक के पैक में खाने-पीने की सामग्री परोसने के खतरों से निजात पाने के लिए दुनियाभर में लगातार शोध हो रहे हैं। वैज्ञानिक व उद्यमी इसके विकल्प तलाश रहे हैं। इन्हीं प्रयासों में हैदराबाद के नारायण पीसपति ने मोटे अनाज के आटे से खाने में इस्तेमाल होने वाला चम्मच बनाया है, जिसे खाना समाप्त करने के बाद थाली में रखने की जरूरत नहीं है। मतलब, चम्मच भी भोजन का हिस्सा ही है।
इसे भी पढ़ें :पीएम मोदी ने कहा- ट्रेडिशनल मेडिसिन का ग्लोबल सेंटर बनेगा इंडिया
समुद्री शैवाल से बना वाटरपॉट
इसी तरह ब्रिटेन के एक स्टार्ट-अप ने समुद्री शैवाल से वाटरपॉट यानी जलपात्र बनाया है। वहां के अखबार ‘गार्जियन’ की रपट में कहा गया कि है कि यह प्लास्टि की वैश्विक समस्या का समाधान बन सकता है। यदि यह प्रयोग सफल रहा और इसमें कोई हानिकारक तत्व नहीं पाया गया, तो यह प्लास्टिक के बोतलबंद पानी की जगह ले सकता है। गौरतलब है कि पिछले महीने बोतलबंद पानी में प्लास्टिक के सूक्ष्म कणों के मौजूद होने की बात सामने आई थी, जिससे उपभोक्ताओं की सेहत पर गंभीर खतरा होने की बात कही गई थी।
दुनिया में हो रहे कई प्रयोग
ब्रिटेन की ही एक कंपनी ने पिछले साल सितंबर में समुद्री शैवाल से निर्मित पैकेजिंग सामग्री में बर्गर या नूडल को पैक करने की तरकीब निकाली थी। न्यूयॉर्क की एक कंपनी ने एक ऐसा कप बनाया है, जिसे आप खा सकते हैं। यह समुद्री घास व शैवाल से निर्मित है। पोलैंड की एक कंपनी ने गेहूं की भूसी से प्लेट बनाया है, जिसे आप खा सकते हैं।
इसे भी पढ़ें :ढाई महीने बाद निकाली गई किशोरी की दफनाई लाश, अब होगी जांच












