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घोर महापाप : बालगृह में पेशाब लगते ही चीखने-चिल्‍लाने लगती है लड़कियां, देखें क्‍यों…(VIDEO)

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Ranchi (Neeraj Thakur/Sanjay/Rupam) अंधेरा छाते ही उनकी रूह कांपने लगती है। डर से रात में पानी तक नहीं पीती। लाख चिखती-चिल्लाती दरवाजा पीटती रह जाये, उनके कमरे को खोला नहीं जाता। बिस्तर पर ही उन्हें पेशाब करने को कहा जाता है। एक लड़की जब ऐसा कर गई तो उसे उसका ही पेशाब पीने के लिये मजबूर कर दिया गया। गंदी-गंदी गालियां बकी जाती है। भरपेट भोजन तक नहीं। रात में दिन का ही बासी खाना परोसा जाता है। कुछ तो भूख से कुलबुलाती रहती है, खाना मांगने पर मोटा डंटा से पिटवाने और रिमांड होम भेज देने की धमकी मिलती है। पीने को टंकी का गंदा पानी ही नसीब। तन ढंकने को नये कपड़े तक नहीं मिलते। फटे पुराने में कट रही जिंदगी। जिल्लत, जलालत और अपमान भरी इस तरह की जिंदगी जीने को मजबूर हैं बालगृह की लड़कियां।

यह बालगृह गिरिडीह के मोहनपुर में है। इस बालगृह का संचालन समन्वय संस्था मरीयम, कोडरमा द्वारा किया जाता है। संस्था का रजिस्ट्रेशन नंबर JH/SW/CCI/@(/16-17) है। जुल्‍मों-सितम की गाथा लिखने वाली बालगृह की अधीक्षक शोभा कुमारी है। वह अकूत संपत्ति की मालकिन है। बालगृह में रहनेवाली लड़कियों की लाज भी खतरे में। यहां लगा सीसीटीवी का फुटेज शोभा का बेटा अभय आनंद अपने मोबाइल या लैपटॉप पर देखा करता है। रात में अभय का आना-जाना सबकों चौंका जाता है। यह सनसनीखेज खुलासा गिरिडीह के उपायुक्त ने अपने एक पत्र (पत्रांक 147) में किया है। उपायुक्त ने इस मसले पर कठोर कार्रवाई करने की जरूरत बताई है। डीसी ने यह पत्र झारखंड राज्य बाल संरक्षण संस्था और समाज कल्याण महिला विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के विशेष सचिव और परियोजना निदेशक को लिखा है। डीसी ने समन्वय संस्था के रजिस्ट्रेशन को रद्द करने की अनुशंसा भी की है। डीसी के पत्र के आलोक में महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने संस्था के सचिव के नाम कुल 10 बिंदु पर स्पष्टीकरण मांगा है। डीसी के अलावा गृह से हटी और हटाई गई कई कर्मचारियों और राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने संबंधित अधिकारी से लेकर प्रधानमंत्री तक को पत्र भेजा है। सबने यही कहा कि… झारखंड में घोर महापाप हो रहा है बालगृह में रहनेवाली लड़कियों के साथ। अगर पूरे मामले की गहराई से जांच हो गई तो बड़ा कांड निकल कर सामने आ सकता है।

विभागीय सूत्र बताते हैं कि बालगृह (बालिका) की अधीक्षक शोभा कुमारी का खूंटा इतना मजबूत है कि उसे डगमगाना आसान काम नहीं। उनके हमदर्द और मददगार हैं राज्य के दो बड़े अधिकारी। भला हो मंत्री जोबा मांझी का जिन्होंने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया और संस्पेंड करने का आदेश दिया है। वहीं पूरे मामले की जांच करा कर दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है। बालगृह में जफा ऐसी कि गृह की बाल कल्याण अधिकारी रूपम श्रीवास्तव, परामर्शी कंचन कुमारी एवं केस वर्कर आकांक्षा कुमारी वहां से हट चुकी हैं। इल्जाम है कि इन्हें पूरी तनख्वाह तक नहीं दी जाती थी।

इल्‍जाम लगाया गया है कि अधीक्षक शोभा कुमारी अपनी मर्जी की मालकिन और मनमौजी है। नियम-कानून, कायदे उनके लिए कुछ नहीं। बाल गृह में काम करने वाली गीता और ललीता रोबोट है। रिमोट कंट्रोल खुद थामे है शोभा और उसका बेटा अभय आनंद। इस पूरे इल्‍जाम के बारे में पूछने पर शोभा कुमारी ने सिर्फ इतना कहा कि सभी आरोप बेबुनियाद है। बाकी सवालों पर वह चुप्‍पी साध गई।

शोभा को काफी करीब से जानने वाले एक शख्‍स ने बताया कि आज की तारीख में दिल्‍ली, हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, राजगीर, पटना और रांची में जो कुछ अफरात हासिल किया है, अगर उसकी जांच हो जाये तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे। विदेश टूर की शौकीन बेवा शोभा कुमारी के कई किस्‍से दफन हैं, जो बहुत जल्‍द खुलकर सामने आ सकते हैं। रांची के पंडरा में बालाश्रय में जो कुछ हुआ, वह अब किसी से छुपा नहीं। बालाश्रय को बंद करना पड़ा। दुराचारी सुरक्षागार्ड शंंभू प्रसाद लोहरा को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। शंभू समाज कल्‍याण विभाग के एक अधिकारी का साला है। इस अधिकारी के खिलाफ भी ठोस कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है। इस अधिकारी के कई नाते-रिश्‍तेदार झारखंड के कई होम में तैनात है।

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