Ranchi : आज झारखंड की सुबह कुछ अलग थी। राज्य के 35,000 सरकारी विद्यालयों में एक साथ कदम थम गये, सभी के सिर झुक गये और आंखों में तैर आई गुरुजी की तस्वीर। 32 लाख से अधिक छात्र-छात्रायें, 1 लाख से ज्यादा शिक्षक और लाखों अभिभावक, सभी ने एक स्वर में दिशोम गुरु स्व. शिबू सोरेन को याद किया। मौन और प्रार्थना में डूबी सुबह, प्रार्थना सभा में मौन धारण कर शुरू हुई, बच्चों ने गुरुजी का संघर्ष जाना। आदिवासी हक की रक्षा, भूमि सुधार, शिक्षा के प्रसार और झारखंडी अस्मिता के लिये लड़ी गई अनगिनत लड़ाइयां।
बच्चों का संकल्प
गुरुजी के जीवन से प्रेरित होकर नन्हें-नन्हें हाथ उठे, संकल्प लिया “हम भी सत्य, न्याय और समाज सेवा की राह पर चलेंगे और अपने झारखंड को आगे बढ़ायेंगे।” शिक्षा विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने कहा “गुरुजी सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि झारखंड की आत्मा थे। उनका जीवन हर युवा को संघर्ष, सेवा और समर्पण का पाठ पढ़ाता है।” आज नेमरा से लेकर राज्य के कोने-कोने तक, हर बच्चे के दिल में गुरुजी की कहानी अंकित हो गई। वहीं, झारखंड की हवा ने जैसे फुसफुसाकर कहा,”गुरुजी, आप थे… आप हैं… और हमेशा रहेंगे।”












