Ranchi : रांची की धरती आज कुछ और ही मौन थी और बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर खामोशी में भी एक गर्जना थी — वो गर्जना, जो शहीद अग्निवीर नीरज कुमार चौधरी की वीरगाथा सुना रही थी। देवघर के मधुपुर के एक छोटे से गांव कजरा की माटी ने जिस लाल को जन्म दिया, आज उसी की देह तिरंगे में लिपटी हुई लौट आई थी। फूलों की खुशबू में आज बलिदान की वह गंध थी, जो सिर्फ़ मिट्टी से प्रेम करने वाले वीरों के नसीब में होती है। शहीद नीरज जम्मू-कश्मीर के लद्दाख (सियाचिन) में तैनात थे। राजभवन से जब राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार आये और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नीरज की पार्थिव देह पर पुष्पचक्र रखा तो ऐसा लगा मानो पूरा झारखंड उस वीर को नमन कर रहा हो, जिसने अपने प्राणों से देश की मिट्टी सींच दी।
मुख्यमंत्री की आंखों में गम नहीं, गर्व था जैसे कह रहे हों, “नीरज, तुम गये नहीं… अमर हो गये हो!” एयरपोर्ट की फिज़ा में आज न कोई शोर था, न कोई हल्ला… बस तिरंगे के लहराने की धीमी सरसराहट थी, और मां भारती की गोद में लौटे उस सपूत की खामोश चीख — जो कह रही थी, “मेरी जान तो गई है, पर देश ज़िंदा रहे।”









