Maharashtra : महाराष्ट्र सरकार को तीन भाषा नीति (Three Language Policy) पर विपक्ष के तीखे विरोध के आगे पिछले आदेश (GR) को रद्द करना पड़ा। अब नई समिति गठित की गई है जो इस पर दोबारा विचार करेगी। उद्धव ठाकरे ने सीधा सवाल दागा, “मुख्यमंत्री मराठी के खिलाफ क्यों हैं? हिंदी को जबरन क्यों थोपा जा रहा है?” उन्होंने कहा, मराठी जनता की एकता के आगे सरकार को झुकना पड़ा। लेकिन असली सवाल यह है कि बेरोजगारी, किसान और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार चुप क्यों है? राज ठाकरे बोले, “यह सरकार की समझदारी नहीं, मराठी जनमत के जोरदार विरोध का नतीजा है।” उन्होंने चेताया “अब अगर दोबारा ऐसा हुआ तो उस समिति को महाराष्ट्र में काम नहीं करने दिया जायेगा।” यहां याद दिला दें कि उद्धव और राज ठाकरे ने 5 जुलाई को मुंबई में विरोध रैली की घोषणा की थी। लेकिन उससे पहले ही सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया। इसे विपक्ष की जीत और सरकार की संवेदनशीलता की मजबूरी माना जा रहा है।
क्या था थ्री लैंग्वेज पॉलिसी विवाद?
पिछले सप्ताह सरकार ने एक GR जारी कर हिंदी को प्राथमिकता देने की बात कही थी। इस पर शिवसेना (UBT), कांग्रेस, NCP (शरद पवार गुट) समेत तमाम विपक्षी दलों ने मराठी अस्मिता के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाया।








