Ranchi : झारखंड के कुख्यात उग्रवादी संगठन TPC के शीर्ष कमांडरों में शामिल बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह का वाराणसी में यूपी ATS के साथ मुठभेड़ में अंत हो गया। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, बृजेश के खिलाफ झारखंड के अलग-अलग जिलों में 44 से अधिक गंभीर मामले दर्ज थे। हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी, लेवी वसूली, हथियार, आगजनी और पुलिस पर हमले जैसे मामलों में उसका नाम सामने आया था। वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, लावालौंग में पुलिस गश्ती दल पर हुये हमले में बृजेश की भूमिका बताई गई थी। इस हमले में दो CRPF जवानों की हत्या हुई थी और पुलिस की SLR राइफल लूट ली गई थी। चतरा के मेरमगढ़ा में 2018 में मनरेगा ठेकेदार नागेश्वर गंझू की हत्या के मामले में भी उसका नाम सामने आया था। इल्जाम था कि लेवी को लेकर TPC दस्ते ने ठेकेदार के साथ मारपीट की थी।
कोयला कारोबारियों से लेवी का आरोप
टंडवा के कोयला क्षेत्र में ठेकेदारों, ट्रांसपोर्टरों और कोयला कारोबारियों से लेवी वसूली के मामले में भी बृजेश का नाम सामने आया। मामले की जांच बाद में NIA ने अपने हाथ में ली थी। जांच के दौरान लाखों रुपये की नकदी बरामद होने का रिकॉर्ड न्यायिक दस्तावेजों में दर्ज है। बृजेश गंझू लंबे समय से फरार था। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, झारखंड सरकार ने उस पर 25 लाख रुपये और NIA ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। अब वाराणसी में मुठभेड़ में उसकी मौत के बाद जांच एजेंसियां उसके नेटवर्क और संपर्कों की पड़ताल में जुटी हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि वह वाराणसी में किन लोगों के संपर्क में था और उसके साथ जुड़े अन्य लोग कौन हैं।




