Delhi : दिल्ली के दक्षिणपुरी में उस वक्त मातम पसर गया, जब एक कमरे से चार नौजवानों की लाशें बरामद हुईं। सबके चेहरे पर नींद का सुकून नहीं, दम घुटने का दहशत भरा अंत था। ये चारों एसी मैकेनिक थे, जो काम की तलाश में बरेली से दिल्ली आये थे। सपनों की तलाश में, लेकिन लौटेगा अब सिर्फ उनका शव। 30 साल का इमरान उर्फ सलमान, जिसने इन तीनों को काम सिखाया था, मास्टर भी था और मार्गदर्शक भी। 20 साल का मोहसिन, अभी ज़िंदगी की शुरुआत ही तो की थी। 25 वर्षीय हसीब, जिसने शायद कभी नहीं सोचा था कि इस बार घर वापसी यूं होगी और महज 18 साल का कपिल उर्फ अंकित, जिसका छोटा भाई चाउमिन बेचता है… अब वो भाई ताउम्र बड़े भाई की तस्वीर देखेगा। कमरे में एसी चल रहा था, दरवाजा अंदर से बंद और चारों शरीर अकड़े हुये थे। पुलिस को नाइट्रोजन, एलपीजी, ऑक्सीजन और एसी में इस्तेमाल होने वाली गैस के सिलिंडर मिले। संभावना है कि किसी गैस के लीक होने से दम घुटा शायद एक नहीं, कई गैसें एकसाथ रिसीं। FSL और क्राइम टीम ने सिलिंडरों की जांच की है, और अब रासायनिक विशेषज्ञों से राय ली जा रही है।
जब दरवाज़ा नहीं खुला और रिश्तेदार को मिली खामोश चीख
मोहसिन का भाई फारूख जब फोन करता रहा और जवाब न मिला, तो रिश्तेदार जीशान ने जाकर दरवाजा खटखटाया।
दरवाजा नहीं खुला। अंदर से गैस जैसी गंध आ रही थी। पड़ोसी जुटे, पुलिस आई, और जब दरवाजा तोड़ा गया वहां चार ज़िंदगियां शांत पड़ी थीं। जैसे मौत ने धीरे से सबको छू लिया हो।
पोस्टमार्टम का इंतजार
चारों को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इमरान, मोहसिन और कपिल को मृत घोषित कर दिया गया। हसीब की सांसें चल रही थीं, लेकिन शनिवार दोपहर उसने भी दम तोड़ दिया। अब पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड से कराया जायेगा ताकि मौत की असली वजह सामने आ सके। चारों के घरों में मातम है। माएं बेसुध हैं, पिता स्तब्ध हैं और भाई-बहन खामोश।












