Kohramlive : जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल और अनुभवी राजनेता सत्यपाल मलिक अब नहीं रहे। मंगलवार को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में 79 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के छोटे से गांव हिसावदा से निकलकर उन्होंने राजनीतिक जीवन की जो यात्रा तय की, वह उतार-चढ़ाव, बदलाव और बगावती तेवरों से भरी रही।
व्यक्तिगत जीवन व शुरुआती दौर
- जन्म: जुलाई 1946, हिसावदा गांव (बागपत, उत्तर प्रदेश)
- शिक्षा: B.Sc. (मेरठ यूनिवर्सिटी), LLB
- मेरठ कॉलेज से छात्र राजनीति की शुरुआत (1966-67 में छात्रसंघ अध्यक्ष)
- समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया की विचारधारा से प्रभावित होकर सक्रिय राजनीति में आये
राजनीतिक करियर: चार दशक, कई दल
भारतीय क्रांति दल → लोकदल (चौधरी चरण सिंह)
- 1970 में चौधरी चरण सिंह की पार्टी से विधायक बने
- 1975 में लोकदल के अखिल भारतीय महासचिव
- 1980 में राज्यसभा सदस्य
1984 – कांग्रेस में शामिल
- राज्यसभा में रहते हुए कांग्रेस जॉइन की
- 1986 में फिर राज्यसभा भेजे गए, प्रदेश महासचिव भी बने
1987 – कांग्रेस से बगावत, अपनी पार्टी बनाई
- बोफोर्स विवाद पर कांग्रेस छोड़ी
- जनमोर्चा बनाकर VP सिंह के साथ आंदोलन का चेहरा बने
- 1988 में पार्टी का विलय जनता दल में
- 1989 में अलीगढ़ से सांसद बने (जनता दल)
2004 – भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश
- बागपत से चुनाव लड़ा (हार मिली)
- यूपी भाजपा उपाध्यक्ष, किसान मोर्चा प्रमुख बने
- 2012 में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त
- 2014 लोकसभा घोषणापत्र समिति में कृषि उप-समिति के प्रमुख
राज्यपाल के रूप में कार्यकाल
| राज्य | कार्यकाल | प्रमुख घटनाएं |
|---|---|---|
| बिहार | 2017 | पहली नियुक्ति |
| जम्मू-कश्मीर | 2018-2019 | अनुच्छेद-370 हटाने के दौरान राज्यपाल |
| गोवा | 2019-2020 | कृषि मुद्दों पर मुखर रहे |
| मेघालय | 2020-2022 | किसान आंदोलन का खुलकर समर्थन |
विवाद और साहसी बयान
- किसान आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार की आलोचना की
- अनुच्छेद-370, पुलवामा अटैक और भ्रष्टाचार पर दिये बयान सुर्खियों में रहे
- निधन से तीन महीने पहले तक सीबीआई की जांच में उनका नाम सुर्खियों में रहा
अंतिम विदाई
उनके निधन से राजनीतिक जगत में शोक की लहर है। विभिन्न दलों के नेताओं ने सत्यपाल मलिक को एक बेलौस, बेबाक और जमीनी नेता बताते हुए श्रद्धांजलि दी।














