नई दिल्ली : यह चौंकाने वाला मामला अमरोहा में घटित 2008 का है, जहां शबनम नाम की महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने सात परिजनों को कुल्हाड़ी से काट बेरहमी से मार डाला था। इस मामले में निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने उसे फ़ांसी की सज़ा सुनाई थी। इसके बाद शबनम ने राष्ट्रपति से दया की गुहार लगाई लेकिन अब राष्ट्रपति भवन ने भी उसकी दया याचिका को खारिज कर दी है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो भारत के इतिहास में शबनम पहली महिला होगी जिसे फांसी की सज़ा सुनाई जाएगी।
फांसी देने मे कोई अड़चन ना आए इसलिए बिहार के बक्सर से रस्सी मंगवाई जा रही है। निर्भया के दोषियों को फंदे से लटकाने वाले पवन जल्लाद दो बार फांसी घर का निरीक्षण भी कर चुके हैं। उन्हे तख्ते के लीवर में जो कमी दिखी उसे जेल प्रशासन ने ठीक करवा दिया है।
करीब 150 साल पहले मथुरा में महिलाओं के लिए फांसी घर बनवाया गया था लेकिन वहां अब तक किसी को फांसी नहीं दी गई है। मथुरा जेल के अधीक्षक शैलेंद्र कुमार मैत्रेय ने बताया कि अभी फांसी की तारीख तय नहीं की गई है और ना ही कोई आदेश आया है लेकिन जेल प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। डेथ वारंट जारी होते ही शबनम को फांसी दे दी जाएगी।
यहां बता दें कि अगर शबनम को फांसी होता है, तो भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब किसी महिला को उसके आपराध के लिए फांसी की सजा दी जाएगी।
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