‘एक नाव है, लेकिन इतने लोगों के लिये काफी नहीं’
ग्रामीणों के अनुसार फिलहाल आने-जाने के लिये एक नाव की व्यवस्था की गई है। लेकिन बाढ़ प्रभावित आबादी को देखते हुये यह पर्याप्त नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि अंचलाधिकारी को लगातार स्थिति की जानकारी दी जा रही है, लेकिन अभी तक आने-जाने के लिये पर्याप्त नाव उपलब्ध नहीं कराई गई है। बाढ़ के बीच नाव ही सड़क है और नाव ही गांव को बाहर की दुनिया से जोड़ने का जरिया। ऐसे में एक नाव पर निर्भरता लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। बाढ़ ने किसानों की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार सैकड़ों एकड़ में लगी फसल डूब गई है। इससे आर्थिक नुकसान का खतरा तो है ही, मवेशियों के लिये चारे का संकट भी गहराने लगा है। पहले से जमा किया गया भूसा भी बाढ़ के पानी में भीगकर खराब होने लगा है। ऐसे में पशुपालकों के सामने अपने मवेशियों के लिये चारे की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है।
ईंधन और चारा सबसे बड़ी चिंता
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि इस समय सबसे ज्यादा परेशानी ईंधन और पशु चारे को लेकर है। फसलें डूब चुकी हैं और घर में रखा चारा भी खराब हो रहा है। पानी के बीच बाजार तक पहुंचना आसान नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों को लेकर ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीणों के अनुसार प्रभावित बस्ती में अभी तक राहत शिविर नहीं लगाया गया है।







