Hazaribagh(Shivnarayan Sahu) : सुबह के तीसरे पहर जब हजारीबाग के बड़कागांव की सड़कें नींद से जाग रही थीं, तभी ब्लैकबेरी रेस्टोरेंट के पास एक बालू से लदा हाईवा आम के पेड़ से टकराकर पलट गया। चीखें गूंजीं, मगर मदद नहीं आई, क्योंकि ड्राइवर नीतीश कुमार, अपनी सीट में ही चार घंटे तक फंसा रहा। टूटे हुये पैर के साथ… इंतज़ार करता रहा, जैसे कोई उम्मीद अब भी ज़िंदा हो। यह महज एक हादसा नहीं था, ये तो उस अवैध बालू कारोबार की चुप दास्तान थी, जो कागजों पर नहीं, सड़कों और नदियों पर दौड़ रहा है… खुल्लमखुल्ला।
स्थानीय लोगों की मानें तो इस हाईवा का कनेक्शन जिले के एक दबंग राजनेता के परिवार से जुड़ा है। लेकिन इससे भी बड़ा सवाल ये है कि जब बड़कागांव में एक भी नदी घाट का टेंडर नहीं हुआ, तो फिर बालू आखिर आ कहां से रहा है।जवाब सबके पास है, मगर कोई कुछ कहता नहीं। एनजीटी ने जहां 10 जून से 15 अक्टूबर तक नदियों से बालू उठाने पर पाबंदी लगाई है, वहीं बड़कागांव की नदियां अब भी रात के अंधेरे में चुपचाप लुट रही हैं। एक ही चलान से तीन ट्रिप बालू निकलती है, लेकिन न कोई रोक है, न कोई जांच।




