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“रामलाल, गांव में कोई चौबे रहता है?” ना मालिक…बाप रे..इतना बड़ा गोलमाल…

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Garhwa(Nityanand Dubey) : जिला परिषद सदस्य शंभू चंद्रवंशी सरकारी डाटा की मोटी फाइल लिये सीधे चौपाल पर पहुंचे और सवाल किया, “रामलाल, तुम्हारे गांव में कोई रविकांत चौबे रहता है?” रामलाल ने चौंक कर सिर हिलाया, “ना मालिक, ऐसा कोई नाम तो कभी सुना ही नहीं!” तब चौपाल में मौजूद हर किसी के मुख से हौले से बस इतना ही निकला, अरे बाप रे बाप, इतना बड़ा गोलमाल…जैसे-जैसे मामले की परतें खुलती गईं, गांव के लोगों में गुस्से की लहर दौड़ गई। बुजुर्गों ने अपनी छड़ियां टिका दीं, नौजवानों ने सवाल उठाने शुरू कर दिये, और गांव की औरतों ने एक-दूसरे से फुसफुसा कर कहना शुरू किया— “कहीं यह हमारे मेहनत की रोटी पर डाका तो नहीं?”

गढ़वा में किसान सम्मान निधि योजना में करोड़ों का फर्जीवाड़ा होने की खबरें सबको चौंका गई। सिस्टम की नाकामी या मिलीभगत? इसका खुलासा जांच के बाद ही होगा। हजारों जरूरतमंद किसानों के हक का पैसा उन लोगों की जेब में जा रहा है, जिनका खेती से कोई लेना-देना नहीं है। पीएम किसान सम्मान निधि योजना, जो देश के किसानों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए बनी थी, वह अब किसी और की जेबें भरने में लगी थी। गढ़वा जिले के बिसुनपुरा प्रखंड में ऐसा मायाजाल बुना गया कि दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार और छत्तीसगढ़ तक के नाम यहां की जमीन पर उग आये। जैसे किसी ने रातों-रात परदेसी चेहरों को गांव के ठेठ माहौल में गूंथ दिया हो। आज गढ़वा में एक बड़े घोटाले की तस्वीर बन गई है।

फर्जी नाम, फर्जी पते, करोड़ों की हेराफेरी

जांच में सामने आया कि बिसुनपुरा प्रखंड के कमता, जोगीखुर्द, पिपरीकला, पिपरीखुर्द गांवों के नाम पर सैकड़ों लाभार्थियों की लिस्ट तैयार की गई, लेकिन इनमें से अधिकतर लोग इन गांवों में रहते ही नहीं हैं। सरकारी दस्तावेजों में इन नामों की एंट्री तो है, लेकिन जब स्थानीय प्रतिनिधियों ने गांव में जाकर हकीकत जानी, तो यहां कोई भी व्यक्ति इन नामों से परिचित नहीं निकला।

इस फर्जीवाड़े की जड़ें सिर्फ बिसुनपुरा तक सीमित नहीं हैं। गढ़वा जिले के 20 प्रखंडों में यह खेल जारी है, जहां फर्जी लाभार्थियों को करोड़ों रुपये बांटे जा चुके हैं। जिला परिषद सदस्य शंभू चंद्रवंशी ने जब इस मामले को गहराई से खंगाला, तो कई चौंकाने वाले नाम सामने आये। कुछ गांव वालों का कहना था कि यह किसानों के हक पर किया गया संगठित डाका है।

  • दिल्ली का रविकांत चौबे – सरकारी कागजों में कमता गांव का निवासी
  • बिहार का दिनेश कुमार – कागजों में जोगीखुर्द का पता
  • छत्तीसगढ़ की मनीता – रजिस्टर में जोगीखुर्द की निवासी
  • महाराष्ट्र का संजय साह – चित्तरी गांव में दर्ज
  • गुजरात का संतोष कुमार महतो – डाटा एंट्री बटौवा के नाम पर
  • उत्तर प्रदेश की रंगीता – कमता गांव की निवासी के रूप में पंजीकृत

 

प्रशासन की प्रतिक्रिया और अगला कदम

जिला परिषद सदस्य शंभू चंद्रवंशी ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुये जिले के उप-विकास आयुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने कहा, “हमने जांच के आदेश दे दिए हैं। बिसुनपुरा अंचल अधिकारी (CO) को इस पूरे घोटाले की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिये कहा गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कठोर कार्रवाई की जायेगी।”

 

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