Kohramlive : ED के डायरेक्टर संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल तीसरी बार बढ़ाने के केन्द्र सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने गैर कानूनी ठहराया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब केन्द्र सरकार को ED के नये चीफ की नियुक्ति करनी होगी। संजय कुमार मिश्रा 31 जुलाई तक अपने पद पर बने रह सकते हैं। केंद्र ने साल 2018 के नवंबर माह में संजय कुमार मिश्रा को दो साल के लिए ED का डायरेक्टर बनाया था। इसके बाद उन्हें रिटायर होना था, लेकिन सरकार ने उन्हें एक साल का एक्सटेंशन दे दिया। इस फैसले को कॉमन कॉज नाम के NGO ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। याचिका पर जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजय करोल की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने 2021 में कार्यकाल बढ़ाने वाले कानून में हुए बदलाव को वैध बताया है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी जांच एजेंसी के डायरेक्टर के कार्यकाल को बढ़ाया जा सकता है, लेकिन सरकार को इसकी ठोस वजह लिखित में बतानी होगी। साल 2021 में कोर्ट ने मिश्रा को मिले एक्सटेंशन को बरकरार रखा था। कोर्ट ने यह कहा था कि मिश्रा को अब आगे इस पद पर कोई एक्सटेंशन नहीं दिया जायेगा। इस मामले में सरकार का तर्क है कि संजय मिश्रा की जगह लेने के लिए अभी कोई दूसरा अफसर तलाश नहीं किया जा सका है। वे अभी मनी लॉन्ड्रिंग के कई मामलों की निगरानी कर रहे हैं। ऐसे में नई नियुक्ति के लिए हमें थोड़ा और समय चाहिए।
2021 में ही SC के फैसले के खिलाफ केंद्र अध्यादेश लाई
केंद्र सरकार नवंबर 2021 में सेंट्रल विजिलेंस कमीशन एक्ट में बदलाव करके एक अध्यादेश ले आई। इस संशोधन में प्रावधान था कि जांच एजेंसी ED और CBI जैसी एजेंसियों के डायरेक्टर को पांच साल तक का एक्सटेंशन दिया जा सकता है। इसके बाद 17 नवंबर 2022 को सरकार ने 18 नवंबर 2023 तक के लिए संजय मिश्रा का कार्यकाल फिर बढ़ा दिया। केंद्र के फैसले के खिलाफ कॉमन कॉज NGO की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की गई। कोर्ट ने 8 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि संजय मिश्रा किसी राज्य के DGP नहीं हैं, वो एक ऐसे अधिकारी हैं, जो संयुक्त राष्ट्र में भी देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जांच की निगरानी कर रहे हैं। डायरेक्टर पद पर उनका बना रहना देश हित में जरूरी है। साथ ही FATF की समीक्षा हो रही है, ऐसे में कुछ दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
1984 में इंडियन रेवेन्यू सर्विस यानी IRS में संजय मिश्रा सिलेक्ट हुए थे। वे करीब 34 साल इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में अपनी सेवा दे चुके हैं। वहीं वे विदेशों में धन छुपाने वाले भारतीयों के मामलों को देखने वाले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी CBDT के विदेशी कर विभाग में भी काम कर चुके हैं। वहीं नेहरू-गांधी परिवार से जुड़े नेशनल हेराल्ड केस समेत ICICI बैंक की पूर्व CEO चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के केस और यस बैंक के राणा कपूर का केस की जांच उनकी देखरेख में हुई।
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