KohramLive : PM नरेंद्र मोदी ने कहा कि ”मैं आज प्रभु श्री राम से क्षमा याचना भी करता हूं, हमारे पुरूषार्थ, त्याग और तपस्या में कुछ तो कमी रह गई होगी कि हम इतनी सदियों तक ये कार्य नहीं कर पाये। आज वो कमी पूरी हुई है। मुझे विश्वास है कि प्रभु राम आज अवश्य क्षमा करेंगे। लंबे वियोग से आई आपत्ति का अंत हो गया। त्रेता युग में तो वह वियोग केवल 14 वर्षों का था, तब भी इतना असह्य था। इस युग में तो अयोध्या और देशवासियों ने सैकड़ों वर्षों का वियोग सहा है। हमारी कई-कई पीढ़ियों ने वियोग सहा है।” अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद PM मोदी जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।
पीएम ने कहा ‘दैवीय आशीर्वाद और दिव्य आत्माओं की वजह से यह कार्य पूरा हुआ है। मैं इन सभी दिव्य चेतनाओं को भी नमन करता हूं। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान की पहली प्रति में भगवान राम विराजमान हैं। संविधान के अस्तित्व में आने के बाद भी दशकों तक प्रभु श्रीराम के अस्तित्व को लेकर कानूनी लड़ाई चली। मैं भारत की न्यायपालिका का आभार व्यक्त करूंगा, जिसने न्याय की लाज रखी। न्याय के पर्याय प्रभु राम का मंदिर भी न्यायबद्ध तरीके से ही बना।’ प्रधानमंत्री ने कहा गुलामी की मानसिकता को तोड़कर उठ खड़ा हुआ राष्ट्र, अतीत के हर दंश से हौसला लेता हुआ राष्ट्र ही नये इतिहास का सृजन करता है। आज से हजार साल बाद भी लोग आज की तारीख को याद करेंगे और आज के इस पल की चर्चा करेंगे।’
‘प्रभु राम भारत की आत्मा के कण-कण से जुड़े हैं’
PM मोदी ने कहा ‘अपने 11 दिनों के व्रत-अनुष्ठान के दौरान मैंने उन स्थानों को चरणस्पर्श करने का प्रयास किया, जहां प्रभु राम के चरण पड़े। मेरा सौभाग्य है कि इसी पुनीत पवित्र भाव के साथ मुझे सागर से सरयू तक की यात्रा का अवसर मिला। प्रभु राम तो भारत की आत्मा के कण-कण से जुड़े हुए हैं। राम भारतवासियों के अंतर्मन में विराजे हुए हैं। हम भारत में कहीं भी किसी की अंतरात्मा को छुयेंगे तो इस एकत्व की अनुभूति होगी और यही भाव सब जगह मिलेगा। हर युग में लोगों ने राम को जिया है। हर युग में लोगों ने अपने-अपने शब्दों में, अपनी-अपनी तरह से राम को अभिव्यक्त किया है। ये रामरस जीवन प्रवाह की तरह निरंतर बहता रहता है। आज हमारे राम आ गये हैं। सदियों की प्रतिक्षा के बाद हमारे राम आ गये हैं। सदियों के अभूतपूर्व धैर्य, अनगिनत बलिदान, त्याग और तपस्या के बाद हमारे प्रभु राम आ गए हैं।’
लंबे अर्से के बाद आखिरकार अयोध्या में रामलला विराजमान हो गये हैं। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में देशभर की कई बड़ी हस्तियों ने शिरकत की। PM नरेंद्र मोदी अपने भाषण की शुरुआत सियावर रामचंद्र की जय के जयकारे के साथ की।उन्होंने कहा कि हमारे रामलला अब टेंट में नहीं रहेंगे। हमारे रामलला अब दिव्य मंदिर में रहेंगे। मेरा पक्का विश्वास है, अपार श्रद्धा है, जो घटित हुआ है, इसकी अनुभूति देश और विश्व के कोने-कोने में राम भक्तों को हो रही होगी। यह क्षण आलौकिक है। यह पल पवित्रतम है। यह माहौल, वातावरण, यह घड़ी, प्रभु श्रीराम का हम सब पर आशीर्वाद है। राम को परिभाषित करते हुए ऋषिओं ने कहा है कि रमंते इति रामः। PM मोदी ने कहा कि रामलला के इस मंदिर का निर्माण भारतीय समाज के शांति, धैर्य, आपसी सद्भाव का प्रतीक है। हम देख रहे हैं कि निर्माण किसी आग को नहीं, बल्कि ऊर्जा को जन्म दे रहा है। अपनी सोच पर पुनर्विचार कीजिये, राम आग नहीं हैं, ऊर्जा हैं। राम विवाद नहीं, राम समाधान हैं। राम सिर्फ हमारे नहीं, राम सबके हैं। राम वर्तमान ही नहीं, राम अनंत हैं।
राम आग नहीं, ऊर्जा हैं… राम सिर्फ हमारे नहीं, सबके हैं
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि राम के इस काम में कितने ही लोगों ने त्याग और तपस्या की। अनगिनत लोगों, कारसेवकों, संत-महात्माओं के हम सब पर ऋण हैं। आज का अवसर उत्सवता का क्षण तो है ही, लेकिन यह क्षण भारतीय समाज की परिपक्वता के बोध का भी क्षण है। यह अवसर सिर्फ विजय का नहीं, विनय का भी है। दुनिया का इतिहास साक्षी है कि कई राष्ट्र अपने इतिहास में उलझ जाते हैं, जब देशों ने उलझी हुई गांठों को खोलने का प्रयास किया तो उन्हें सफलता पाने में कठिनाई आई है। लेकिन हमारे देश ने इतिहास की इस गांठ को जिस गंभीरता और भावुकता के साथ खोला है। यह बताता है कि हमारा भविष्य, हमारे अतीत से सुंदर होने जा रहा है।
PM मोदी ने कहा कि यह मंदिर मात्र एक दैव मंदिर नहीं है, यह भारत की दृष्टि का, दर्शन का, दिग्दर्शन का मंदिर है। यह राम के रूप में राष्ट्र चेतना का मंदिर है। राम भारत की आस्था हैं, भारत के आधार हैं। राम भारत का विचार है, विधान हैं। चेतना है, चिंतन हैं। प्रतिष्ठा हैं, प्रताप हैं। राम नेकी भी है, नीति भी है। नित्यता भी है, निरंतरता भी हैं। राम व्यापक हैं, विश्व है, विश्वात्मा हैं। जब राम की प्रतिष्ठा होती है तो उसका प्रभाव वर्षों, शताब्दियों तक नहीं होता, हजारों वर्षों के लिए होता है।
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