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छैमार गिरोह के खूंखार चेहरे का ए’नका’उंटर…

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UP : कभी अंधेरे रास्तों पर खौफ का नाम बन चुका आसिम अली उर्फ विक्की अब अपराध की दुनिया का एक बंद अध्याय बन गया। यूपी के अंबेडकरनगर में हुई मुठभेड़ में एक लाख रुपये का ईनामी यह बदमाश ढेर हो गया। पुलिस को इसकी तलाश गुजरे 12 साल से थी। विक्की उर्फ आसिम अली उर्फ नक्शे हसन उर्फ पेंदा, नाम कई थे, लेकिन पहचान एक ही थी, छैमार गिरोह का कुख्यात चेहरा। करीब दो दशक लंबे अपराध के सफर में उसके खिलाफ 21 केस दर्ज हुये और वह यूपी के कई जिलों से लेकर हरियाणा तक पुलिस के लिये चुनौती बना रहा।

अपराध की रात का अंत

STF की नोएडा यूनिट को सूचना मिली थी कि छैमार गिरोह से जुड़ा विक्की अंबेडकरनगर के टांडा इलाके में एक्टिव है। बेवाना क्षेत्र के कुशालपुर गांव के पास पुलिस ने बाइक सवार दो संदिग्धों को रोकने की कोशिश की। लेकिन बाइक की रफ्तार के साथ बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में विक्की घायल हो गया। अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ में STF इंस्पेक्टर सचिन मिश्रा की बुलेटप्रूफ जैकेट में गोली लगी, जबकि आरक्षी ओमनाथ चौहान भी घायल हुये। मौके से पुलिस ने हथियार, गोलियां, खोखे, बाइक और एक बैग बरामद किया।

कई जिलों में फैला अपराध का जाल

कानपुर के बिल्हौर थाना क्षेत्र के मकनपुर गांव का रहने वाला विक्की कभी अपने गांव में आम चेहरा था। मगर वक्त के साथ उसका रास्ता अपराध की गलियों में मुड़ गया। वर्ष 2006 में मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में लखनऊ पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जेल से बाहर आने के बाद उसका संपर्क छैमार गिरोह के सरगना फाती उर्फ कदीम उर्फ पहलवान से हुआ और यहीं से शुरू हुआ अपराध का लंबा सफर। इसके बाद उसने गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर डकैती और हत्या जैसी संगीन वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया। 23 अप्रैल 2014 की रात जौनपुर के शाहगंज क्षेत्र में हुई एक वारदात ने विक्की को पुलिस की सबसे बड़ी तलाश में शामिल कर दिया। आरोप था कि गिरोह के साथ उसने रेनू सिंह के घर में डकैती डाली। इस दौरान तीन लोगों की हत्या हुई थी। इस मामले में विक्की लंबे समय से फरार चल रहा था और उस पर एक लाख रुपये का ईनाम घोषित किया गया था। इसके अलावा कानपुर देहात, लखनऊ, सुल्तानपुर, फतेहपुर, बाराबंकी, प्रयागराज, कौशांबी समेत कई जिलों और हरियाणा में भी उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज थे।

दरगाह पर चादर चढ़ाकर चुपके से लौट जाता था

कानपुर के मकनपुर कस्बे में विक्की की कहानी भी किसी रहस्य से कम नहीं थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक वर्षों तक उसका गांव से सीधा संपर्क नहीं रहा। लेकिन हर साल लगने वाले मेले के दौरान वह किसी न किसी भेष में मकनपुर आता था। मदार साहब की दरगाह पर चादर चढ़ाता और बिना किसी को भनक लगे वापस लौट जाता। उसे पहचानने वाले भी गिने-चुने लोग थे। ईशन नदी किनारे बसा मकनपुर कभी घुमंतू समुदायों और अपराधी गिरोहों की गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2009-10 के आसपास नट बिरादरी के कई परिवार यहां अस्थायी डेरों में रह रहे थे। बाद में कुछ डकैती की घटनाओं में इन डेरों से जुड़े लोगों के नाम सामने आये थे। पुलिस कार्रवाई के बाद इन अस्थायी ठिकानों को हटा दिया गया था। बताया जाता है कि इन्हीं डेरों में विक्की और उसका परिवार भी रहता था। छैमार गिरोह का सरगना फाती उर्फ कदीम उर्फ पहलवान भी वर्ष 2025 में मथुरा में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। उसके बाद गिरोह के कई सदस्य भूमिगत हो गये थे। फाती के करीब एक साल बाद अब गिरोह का एक और बड़ा नाम विक्की भी पुलिस कार्रवाई में मारा गया।

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