Kohramlive : नेशनल मीडिया सेंटर में रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ कहा “18 साल का हर नागरिक का मतदाता बनना और वोट देना उसका अधिकार और कर्तव्य है। आयोग किसी दल का न तो विपक्ष है, न पक्ष। सभी दल हमारे लिए समान हैं।” चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के आरोपों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, “…या तो हलफनामा देना होगा या देश से माफ़ी मांगनी होगी। कोई तीसरा विकल्प नहीं है। अगर 7 दिनों के अंदर हलफनामा नहीं मिलता है तो इसका मतलब है कि ये सभी आरोप बेबुनियाद हैं…”
बिहार से शुरू हुआ विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)
1.6 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) और सभी राजनीतिक दलों ने मिलकर मसौदा मतदाता सूची तैयार की।
सूची पर सभी दलों के BLA के हस्ताक्षर कराये गये और अभी भी त्रुटि सुधार के लिए 15 दिन का समय है।
आयोग की पारदर्शिता पर भरोसा
CEC ने कहा कि लोकसभा चुनाव की पूरी प्रक्रिया में करोड़ों कर्मचारी और लाखों एजेंट काम करते हैं। इतने पारदर्शी तंत्र में वोट चोरी की गुंजाइश ही नहीं।
विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया
उन्होंने कहा कि कुछ नेता जमीनी स्तर की हकीकत को नजरअंदाज कर रहे हैं और भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। जब बिहार के 7 करोड़ मतदाता आयोग के साथ खड़े हैं, तो उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करना उचित नहीं।
मशीन-पठनीय सूची पर स्पष्टीकरण
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा “सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में स्पष्ट कर दिया था कि मशीन-पठनीय मतदाता सूची निजता का उल्लंघन है। इसलिए यह प्रतिबंधित है। आयोग का फैसला उसी निर्देश के अनुरूप है।” खास बात यह रही कि बिहार SIR शुरू होने के बाद यह आयोग की पहली प्रेस वार्ता थी। सूत्रों का कहना है कि विपक्ष के आरोपों का जवाब तथ्यों के साथ देना जरूरी था।
#WATCH | दिल्ली: चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, “…या तो हलफनामा देना होगा या देश से माफ़ी मांगनी होगी। कोई तीसरा विकल्प नहीं है। अगर 7 दिनों के अंदर हलफनामा नहीं मिलता है तो इसका मतलब है कि ये सभी आरोप बेबुनियाद हैं…” pic.twitter.com/zoI1DUlpKs
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 17, 2025












