Kohramlive : झारखंड हाई कोर्ट परिसर में कानून की किताबों के बीच समाज को जोड़ने की आवाज बुलंद हुई। अधिवक्ता परिषद झारखंड के तत्वावधान में हाई कोर्ट इकाई द्वारा समरसता दिवस डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर हॉल नंबर-5 में मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीनियर एडवोकेट अनिल कुमार कश्यप ने की। उन्होंने बाबा साहेब के जीवन और विचारों पर प्रकाश डालते हुये कहा कि शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पियेगा वो दहाड़ेगा। शिक्षा से ही समाज में बदलाव संभव है, पिछड़े और वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाना जरूरी है।
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कार्यक्रम में बताया गया कि अनुच्छेद 17 से छुआछूत का अंत, अनुच्छेद 14 से 21 तक समानता का अधिकार, बाबा साहेब ने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय को ध्यान में रखकर संविधान की रचना की। कार्यक्रम संयोजक सुनील कुमार ने कहा कि समाज से भेदभाव खत्म करना होगा। पिछड़े वर्गों को आगे लाना होगा। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज कुमार टंडन ने कहा कि जब समाज कास्टलेस होगा, तभी असली विकास होगा।
ज्ञान ही असली ताकत
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि बाबा साहेब के पास जीवनभर हजारों किताबें थीं, उनका मूल मंत्र, “पहले पढ़ो, फिर समाज बदलो” कार्यक्रम के दौरान सफाईकर्मियों और कर्मचारियों को वस्त्र, पुष्प और भारत माता की तस्वीर देकर सम्मानित किया गया। यह दृश्य अपने आप में समरस भारत की झलक बन गया। कार्यक्रम का संचालन हर्ष कुमार, नीता कृष्ण और राधा कृष्ण गुप्ता ने किया, वहीं, धन्यवाद ज्ञापन प्रशांत विद्यार्थी ने किया। यह जानकारी अधिवक्ता रितेश कुमार बॉबी ने दी।
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