Kohramlive : महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद मतदाता सूची और मतदान प्रक्रिया को लेकर लगाये गये इल्जामों पर चुनाव आयोग ने तथ्यों के आधार पर जोरदार जवाब दिया है। आयोग ने साफ किया है कि 2024 में महाराष्ट्र में चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी, कानूनी और राजनीतिक दलों की सहभागिता के साथ पूरी हुई। हाल ही में कुछ राजनीतिक दलों खासकर कांग्रेस ने राज्य में मतदाता सूची में हेराफेरी और चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाये हैं। उन्होंने दावा किया कि मतदान के आखिरी दो घंटे में असामान्य रूप से अधिक वोट डाले गये, जो संदेह पैदा करता है। इसके अलावा BLO की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाये गये।
ECI का बिंदुवार जवाब
वोटिंग का आंकड़ा औसत के अनुरूप: ECI ने बताया कि सुबह 7 से शाम 6 बजे तक कुल 6.4 करोड़ से ज्यादा वोट डाले गये, यानी औसतन हर घंटे 58 लाख वोट। आखिरी दो घंटे में 65 लाख वोट पड़े जो औसत से कम हैं, न कि अधिक।
सभी एजेंटों की मौजूदगी में हुआ मतदान: हर मतदान केंद्र पर उम्मीदवारों के अधिकृत एजेंट मौजूद थे। न तो कांग्रेस और न ही किसी अन्य पार्टी ने रिटर्निंग ऑफिसर या पर्यवेक्षक के समक्ष कोई आपत्ति दर्ज की।
विधिसम्मत प्रक्रिया से बनी मतदाता सूची: चुनाव आयोग ने कहा कि 1950 के जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और 1960 के नियमों के तहत ही मतदाता सूची बनाई गई थी। सभी पार्टियों को अंतिम मतदाता सूची दी गई थी, जिसे किसी ने उस वक्त चुनौती नहीं दी।
कानूनी रूप से बहुत कम अपीलें हुईं: लगभग 9.7 करोड़ मतदाताओं में से सिर्फ 89 अपीलें डीएम के पास और 1 अपील सीईओ के पास दायर की गई, जो दर्शाता है कि उस समय कोई बड़ा विवाद नहीं था।
हर बूथ पर मौजूद थे बीएलए और बीएलओ: राज्य के 1 लाख से अधिक बूथों पर 97,000 से अधिक बीएलओ और सभी प्रमुख दलों के 1.03 लाख बूथ एजेंट, जिनमें कांग्रेस के 27,099 एजेंट, तैनात थे। यह आरोपों को बेबुनियाद साबित करता है।
कांग्रेस को दिसंबर 2024 में ही दिया गया जवाब: चुनाव आयोग ने बताया कि उसने कांग्रेस को 24 दिसंबर 2024 को ही इन सभी तथ्यों से अवगत करा दिया था, और यह जानकारी ECI की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।
चुनाव प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न उठाना दुर्भाग्यपूर्ण
ECI ने दो टूक कहा कि भारत में चुनाव कानून के अनुसार, विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की गरिमा के साथ पूरे होते हैं। किसी भी प्रकार की राजनीतिक हार के बाद आयोग को बदनाम करने की कोशिश न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि हजारों सरकारी कर्मचारियों और लाखों बीएलओ की ईमानदारी पर भी आघात है। आयोग ने दोहराया कि सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की निगरानी में चुनाव संपन्न हुये हैं। वहीं, बेबुनियाद आरोप लगाना राजनीतिक हताशा की निशानी है।






