Chouparan(Krishna Paswan) : हजारीबाग के चौपारण प्रखंड में स्थित डीवीसी (दामोदर वैली कॉर्पोरेशन) का इतिहास शानदार रहा है, लेकिन अब वही संस्थान अपनी असफलता की गवाही दे रहा है। 1948 में स्थापित डीवीसी ने नदी घाटी परियोजनाओं, सिंचाई, बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण के क्षेत्र में कई दशकों तक अद्वितीय कार्य किया। लेकिन आज, वही डीवीसी अपनी उपेक्षा के कारण बच्छई फीस फार्म में मौजूद डेढ़ दर्जन तालाबों की दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।
डीवीसी का गौरव और उसके बाद की घटित घटनाएं
डीवीसी का उद्देश्य हमेशा से दामोदर नदी घाटी के विकास और प्रबंधन पर केंद्रित रहा था। इसके अंतर्गत बाढ़ नियंत्रण, जलसंवर्धन, वनरोपण, मृदा संरक्षण और रोजगार सृजन के लिए कई योजनाएं संचालित की जाती थीं। मैथन, तिलैया, कोनार, पंचेत और बोकारो जैसे महत्वपूर्ण जलाशयों का निर्माण इसके द्वारा हुआ, जिनसे जलविद्युत उत्पादन और सिंचाई सुविधाएं प्रदान की जाती थीं। लेकिन 2000 में झारखंड राज्य के गठन के बाद से डीवीसी की चमक धीरे-धीरे धूमिल होती चली गई। संस्थान के कार्यों की अनदेखी और प्रशासनिक शिथिलता ने उसे संकट के दौर में धकेल दिया है।
फीस फार्म बच्छई का दुखद इतिहास
डीवीसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा, फीस फार्म बच्छई, जो कभी मछली पालन और जल संसाधन का केंद्र था, आज उसकी स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। तीन दशक पहले यहां लगभग डेढ़ दर्जन तालाब बनाए गए थे, जो हमेशा पानी से भरे रहते थे। ये तालाब डीवीसी के द्वारा मछली पालन के लिए इस्तेमाल होते थे और स्थानीय लोगों के लिए आय का एक अच्छा स्रोत थे। यहां से मछली पकड़ने से लाखों की आमदनी होती थी। लेकिन अब, डीवीसी की उपेक्षा और अनदेखी के कारण यह तालाब बंजर हो चुके हैं। पानी की कमी और कंटीली झाड़ियों ने इस क्षेत्र को घेर लिया है। एक समय था जब यहां मछली पालन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाता था, लेकिन अब यह तालाब अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं।
डीवीसी के शाही महल की हालत
वहीं, डीवीसी के पुराने महल का ढांचा आज एक कैटल गार्ड के रूप में तब्दील हो चुका है, जिसका रखरखाव सरजू यादव द्वारा किया जा रहा है। यह क्षेत्र एक समय में रोजगार का हब और खुशहाली का प्रतीक था, लेकिन अब यह इतिहास की एक कड़वी याद बनकर रह गया है। डीवीसी के अधिकारियों द्वारा इस पूरे क्षेत्र की अनदेखी ने उसे खंडहर में तब्दील कर दिया है।
समाज की अपील
स्थानीय लोग अब डीवीसी से गुजारिश कर रहे हैं कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाएं और फीस फार्म बच्छई के तालाबों की स्थिति को सुधारें। अगर इन तालाबों को फिर से जीवन दिया जाता है, तो ना केवल जल संकट का समाधान होगा, बल्कि मछली पालन से पुनः आर्थिक सशक्तिकरण संभव होगा। डीवीसी को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इन तालाबों की मरम्मत और पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि एक समय की खुशहाली और समृद्धि को फिर से लौटाया जा सके।










