द्रौपदी मुर्मू का पार्षद से राष्ट्रपति तक का सफर

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  • आईपीएस मनोज रतन चोथे ने बिताये हैं कुछ लम्हे… देखें वीडियो

Ranchi : आजाद भारत में पहली दफा एक आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू देश के सबसे ताकतवर कुर्सी राष्ट्रपति की शपथ लेगी। 24 जून को नामांकन दाखिल कर राष्ट्रपति पद की सरताज बनी द्रौपदी मुर्मू आगामी 25 जुलाई को ही शपथ लेंगी। वे झारखंड की पहली महिला गर्वनर भी बनीं थीं। वे यहां 18 मई 2015 से 21 जुलाई 2021 तक रहीं। झारखंड और ओडिशा से गहरा नाता रखने वाली द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से उनकी जीवनगाथा जानने को बेताब हो गये हैं लोग, आखिर उनका का अतीत क्या है। द्रौपदी मुर्मू को बेहद करीब से जानने वाले झारखंड के तेज तर्रार आईपीएस मनोज रतन चोथे की नजरों में द्रौपदी मुर्मू करूणा, ममता और सादगी की मूरत है। अहम और वहम से कोसों दूर रहनेवाली द्रौपदी मुर्मू सबका खासकर महिलाओं का भला चाहती हैं। लड़कियां खूब पढ़े-लिखे और हर सेक्टर में आगे बढ़े, यहीं उनका सपना और अरमान भी है। जीवन के सफर में वे कभी विचलित नहीं हुई। आईपीएस मनोज रतन चोथे राजभवन में बतौर ओएसडी द्रौपदी मुर्मू के रह चुके हैं। वतर्मान में हजारीबाग के एसपी हैं।

जीवन गाथा झांकने पर सामने आई ये बातें

द्रौपदी मुर्मू की जीवन गाथा झांकने के बाद जो बातें सामने आई, उसके अनुसार ओड़िसा के एक छोटे से गांव में 20 जून 1958 को जन्मी द्रौपदी मुर्मू जब 7वीं क्लास में थी, तभी इनके गांव में एक मंत्री जी आये। पिता के कहने पर वह अपना सारा शैक्षनिक सर्टिफिकेट लेकर मंत्री जी से मिलने गई, ताकि वह आगे पढ़ सके। द्रौपदी मुर्मू जिंदगी में कुछ अलग करना चाहती थी। साथ ही परिवार को फाइनैंशियल सपोर्ट भी। रामा देवी वीमेंस कालेज से बीए की डिग्री हासिल करने के बाद सचिवालय में नौकरी शुरू की। शादी के बाद उन्हें नौकरी छोड़ना पड़ा। ससुराल के कुछ लोगों को घर की महिलाओं का नौकरी करना पसंद नहीं था। पति से मिले सपोर्ट और उनसे प्रेरित होकर उन्होंने राजनीति की गलियारे में अपना कदम रखा। वह समाज सेवा करना चाहती थी। उन्हें किसी मंत्री ने सलाह भी दी थी कि अगर वह समाज के लिए कुछ अलग और सेवा करना चाहती हैं तो राजनीति का रास्ता चुनें। सड़क, बिजली, पानी से लेकर हर दिक्कत वह दूर करने में सक्षम हो सकती हैं। 1997 में पहली बार वह नगर पंचायत का चुनाव जीत पार्षद बनीं। एक पार्षद से लेकर राष्ट्रपति तक का उनका सफर देश की सभी महिलाओं के लिए एक आदर्श और प्रेरणा है। साफ सुथरी छवि वाली द्रौपदी मुर्मू ने खुद उक्त बातें एक टीवी चैनल को दिये इंटरव्यू में बहुत पहले कहीं हैं। द्रौपदी मुर्मू कहती हैं कि आज की तारीख में महिलाओं में शिक्षा को लेकर काफी लगाव और रुझान है। वह हर सेक्टर में बेहतर कर रही हैं। पुरुष हो या महिला… हर किसी में पोटेंशियल होता है। उन्हें आगे बढ़ने का मौका जरूर मिलना चाहिए।

पति की बातें और यादें से मिली नई ऊर्जा और ताकत

साल 2009 में चुनाव हारने के बाद द्रौपदी मुर्मू अपने गांव लौट गई। एक बेटा भुवनेश्वर में पढ़ता था। बेटा के नहीं रहने की खबर ने उन्हें अंदर से तोड़ डाला। तब जमाने ने उनका साथ दिया। उनकी हिम्मत बढ़ाई। लोगों ने उनसे कहा… एक बेटा चला गया तो क्या हुआ, हम सब हैं ना। बीमार तक पड़ गई थी। अचानक जीने की चाह बढ़ी और समाज के लिए कुछ अलग करने की तमन्ना के मजबूत इरादे ने उन्हें एक नई ऊर्जा और ताकत दी। अचानक एक और मनहूस खबर आई कि दूसरा बेटा भी नहीं रहा। कुछ साल बाद यानी 2014 में पति भी चल बसे। मां और छोटा भाई भी दुनिया छोड़ चुके थे। अंदर से बेहद टूट चुकी द्रौपदी मुर्मू को उनके पति की बातें और यादें आगे ले गई। उनके पति चाहते थे कि वह राजनीति में आये और समाज के लिए कुछ अलग करे। पति से मिले सपोर्ट की वजह से देश और समाज ने उनका मान बढ़ाया।

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