Kohramlive : लिवर हमारे शरीर का वह मेहनती अंग है, जो बिना शोर किये दिन-रात अपना काम करता रहता है। लेकिन हमारी थाली और हमारी दिनचर्या का असर उस पर भी पड़ता है। ज्यादा वजन, असंतुलित खानपान, शराब और शारीरिक गतिविधि की कमी जैसे कारक लिवर में अतिरिक्त फैट जमा होने के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इसी को फैटी लिवर कहा जाता है। इसका एक बड़ा खतरा यह है कि शुरुआती दौर में कई लोगों को इसका पता भी नहीं चलता।
जरूरी नहीं घंटों जिम
फैटी लिवर से जूझ रहे लोगों के लिये अच्छी खबर यह है कि लिवर की सेहत सुधारने के लिये हमेशा भारी-भरकम वर्कआउट या घंटों जिम में पसीना बहाना जरूरी नहीं है। एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में 14 अध्ययनों और 551 लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि नियमित व्यायाम से MRI में मापे गये लिवर फैट में clinically meaningful कमी की संभावना बढ़ी। अध्ययन में सप्ताह में कम से कम 750 MET-मिनट की गतिविधि, जिसका एक उदाहरण करीब 150 मिनट तेज चाल से चलना है, लाभ से जुड़ी मिली। यानी आसान भाषा में कहें तो रोज करीब 20-30 मिनट की नियमित शारीरिक गतिविधि शुरुआत के लिये अच्छी दिशा हो सकती है।
फैटी लिवर का नया नाम MASLD
जिसे पहले नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता था, उसे अब चिकित्सा जगत में मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) कहा जाता है। यह समस्या अक्सर मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य मेटाबोलिक जोखिमों के साथ जुड़ी होती है। अगर लिवर में फैट जमा होने की समस्या बढ़ती जाये और सूजन व फाइब्रोसिस जैसी स्थितियां विकसित हों, तो आगे चलकर गंभीर लिवर रोग का खतरा बढ़ सकता है। इसलिये इसे सिर्फ ‘थोड़ा फैट बढ़ गया’ मानकर छोड़ना ठीक नहीं है।
वजन कम हो या न हो, व्यायाम का फायदा
व्यायाम की खूबसूरती यह है कि इसका फायदा सिर्फ वजन घटने तक सीमित नहीं है। शोध में पाया गया है कि नियमित शारीरिक गतिविधि वजन में बड़ी कमी आये बिना भी लिवर फैट कम करने में मदद कर सकती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ फैटी लिवर वाले लोगों के लिये नियमित शारीरिक गतिविधि को जीवनशैली में बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
150 मिनट का आसान फॉर्मूला
अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन की सिफारिशों के मुताबिक फैटी लिवर वाले लोगों के लिये सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाला व्यायाम या करीब 75 मिनट तेज तीव्रता वाला व्यायाम लक्ष्य रखा जा सकता है। इसे एक साथ करने की जरूरत नहीं। उदाहरण के लिये रोज करीब 30 मिनट, सप्ताह में 5 दिन तेज चाल से चलना। साइकिल चलाना या तैराकी जैसे मध्यम व्यायाम। अपनी क्षमता के अनुसार स्ट्रेंथ एक्सरसाइज भी दिनचर्या में शामिल करना। शुरुआत करने वालों के लिए धीरे-धीरे गतिविधि बढ़ाना ज्यादा व्यावहारिक रहता है। फैटी लिवर में अलग-अलग तरह के व्यायाम पर हुये शोध में एरोबिक और रेजिस्टेंस एक्सरसाइज दोनों से लिवर फैट में कमी के संकेत मिले हैं। योग और प्राणायाम को भी सामान्य शारीरिक सक्रियता और तनाव प्रबंधन की दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि किसी खास योगासन को फैटी लिवर का इलाज मानना सही नहीं होगा।
केवल कसरत नहीं, थाली पर भी दें ध्यान
लिवर की सेहत के लिये व्यायाम के साथ खानपान और वजन प्रबंधन भी अहम हैं। AASLD की सामग्री में सब्जियों, फलों, साबुत अनाज, दालों, नट्स और स्वस्थ वसा वाले आहार पर जोर दिया गया है, जबकि रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, अत्यधिक कैलोरी और ज्यादा फ्रुक्टोज वाले खाद्य-पेय सीमित करने की सलाह दी जाती है। फैटी लिवर का पता चल चुका है तो सिर्फ सोशल मीडिया की सलाह के आधार पर इलाज शुरू या बंद नहीं करना चाहिये। डॉक्टर जरूरत के अनुसार लिवर फंक्शन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं और डायबिटीज, वजन, कोलेस्ट्रॉल आदि जोखिमों का भी मूल्यांकन कर सकते हैं। लिवर अक्सर देर से शिकायत करता है, इसलिये उसकी सेहत का ख्याल पहले से रखना बेहतर है। रोज की थोड़ी-सी चाल, बेहतर खानपान और सक्रिय जीवनशैली, यही छोटी आदतें आगे चलकर लिवर के लिये बड़ी ढाल बन सकती हैं।








