Kohramlive : मेडिकल स्टोर से दवा खरीदते समय आपने कई बार दवा के पत्ते या पैकेजिंग पर बनी सीधी लाल रंग की पट्टी जरूर देखी होगी। बहुत से लोग इसे कंपनी का डिजाइन या सामान्य निशान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन इस निशान का उद्देश्य दवा के इस्तेमाल को लेकर लोगों को सतर्क करना है। इसका मकसद खासतौर पर लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से रोकना और गलत तरीके से दवाओं के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना है।
लाल पट्टी दिखे तो बिना डॉक्टर की सलाह न लें दवा
दवा पर लाल लाइन का संकेत है कि ऐसी दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह और पर्ची के अनुसार किया जाना चाहिये। ऐसी दवाओं को अपनी मर्जी से खरीदकर खाना या किसी दूसरे व्यक्ति की सलाह पर लेना उचित नहीं है। दवा विक्रेता से भी ऐसी दवा लेते समय डॉक्टर की सलाह या प्रिस्क्रिप्शन की जरूरत हो सकती है। लाल पट्टी का इस्तेमाल विशेष रूप से कुछ ऐसी दवाओं की पैकेजिंग पर किया जाता है, जिनका इस्तेमाल चिकित्सकीय निगरानी में किया जाना जरूरी होता है। कंटेंट में एंटीबायोटिक्स, कुछ पेनकिलर्स और डिप्रेशन या नींद से जुड़ी दवाओं का उल्लेख किया गया है। इन दवाओं का गलत, अनावश्यक या जरूरत से ज्यादा सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिये डॉक्टर की सलाह के बिना ऐसी दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिये।
एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल बढ़ा सकता है AMR का खतरा
एंटीबायोटिक्स को बिना जरूरत या गलत तरीके से लेने की एक बड़ी चिंता एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) है। जब एंटीबायोटिक्स का अनावश्यक या गलत इस्तेमाल होता है, तो कुछ बैक्टीरिया इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में भविष्य में संक्रमण होने पर संबंधित दवा का असर कम या खत्म हो सकता है। यही वजह है कि एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना महत्वपूर्ण है।
दवा लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर किसी दवा के रैपर या पैकेजिंग पर लाल पट्टी दिखाई दे तो उसे देखकर खुद से दवा शुरू न करें। बीमारी के लक्षण देखकर इंटरनेट, पड़ोसी या किसी परिचित की सलाह पर दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर ने जो दवा, खुराक और अवधि बताई है, उसका पालन करें और अपनी मर्जी से दवा बंद या शुरू न करें।





