Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा स्थापना दिवस के मौके पर मंगलवार को संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें प्रबुद्धजनों ने ‘सपनों का गढ़वा’ विषय पर अपने विचार रखे। SDO संजय कुमार की अध्यक्षता में हुई इस संगोष्ठी में जिले के विकास, उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हुई। वरिष्ठ पत्रकार नित्यानंद दूबे ने जिले के विकास और चुनौतियों पर प्रकाश डाला, तो समाजसेवी डॉ. यासीन अंसारी ने अतीत और वर्तमान की तुलना करते हुये गढ़वा की प्रगति को सराहा। शिक्षा, सिंचाई, साहित्य और जलसंरक्षण जैसे विषयों पर वक्ताओं ने सुझाव दिये।
संपन्नता और अधूरे सपने
शिक्षाः शिक्षक अरुण दुबे ने शिक्षा पर जोर देते हुये जिले की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की बात कही।
परिवहनः द्वारिका प्रसाद पांडेय ने बताया कि जहां कभी गिनती की गाड़ियां थीं, आज परिवहन सुविधायें मजबूत हो चुकी हैं।
जलसंरक्षणः लायन सुशील केसरी ने भूजल स्तर गिरने पर चिंता जताई और वृक्षारोपण को जरूरी बताया।
साहित्यः नीरज श्रीधर ने जिले में साहित्य मंच की जरूरत पर बल दिया।
धार्मिक और सांस्कृतिक समृद्धिः बृजेश पांडेय ने गढ़वा की धार्मिक धरोहर को संरक्षित करने की बात रखी।
गढ़वा की तरक्की का सपना
समाजसेवी शौकत खान ने कहा कि यहां के लोग समाज सेवा में आगे हैं और प्रशासन से पहले खुद समाधान ढूंढ़ते हैं। वक्ताओं ने गढ़वा को नए आयाम देने के लिए सबको एकजुट होकर काम करने की अपील की। ‘मेरा गढ़वा महान’, इस मौके पर प्रमोद सोनी ने अपने स्वरचित गीत की प्रस्तुति दी, जो माहौल में जोश भर गया। गढ़वा जिला ने बीते वर्षों में लंबा सफर तय किया है, लेकिन सपनों को साकार करने के लिए अब भी कई कदम उठाने बाकी हैं!












