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DGP ने ठाना, कानून का मजबूत हाथ, अब हर बेटी के साथ…

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Ranchi(Bhavna Thakur) : रात का अंधेरा जितना भी घना हो, उम्मीद की लौ कभी बुझती नहीं। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों के साये में जब असुरक्षा की आंधी चली, तब झारखंड पुलिस ने मजबूत दीवार बनकर उन्हें सहारा देने की ठानी। आज, जब सूरज पूरब की देहलीज पर अपनी सुनहरी चूनर फैलाने को था, तब झारखंड पुलिस मुख्यालय में एक ऐसी बैठक बुलाई गई, जो हर बेटी, हर मां और हर मासूम के दिल में सुरक्षा की किरण बनकर उतरने वाली थी। DGP अनुराग गुप्ता की अध्यक्षता में हुई इस समीक्षा बैठक में ठोस फैसले लिये गये, ऐसे फैसले, जो सिर्फ कानून की किताबों में दर्ज होने के लिये नहीं, बल्कि जमीन पर हकीकत का रूप लेने के लिये थे।

बेटियों की राह में अब नहीं होंगे डर के काँटे

कभी किसी कोचिंग सेंटर के बाहर खड़ी सहमी-सी लड़की, कभी किसी मॉल के कोने में खड़ी डरी-सहमी महिला, तो कभी किसी स्कूल की चौखट पर खड़ी नन्ही परी—अब इन्हें बेखौफ मुस्कुराने का हक मिलेगा। पुलिस ने संकल्प लिया कि हर महिला कॉलेज, हॉस्टल, कोचिंग सेंटर और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर महिला हेल्पडेस्क बनाई जायेगी। ताकि जरूरत पड़ने पर किसी को भी मदद के लिए भटकना न पड़े, पुलिस खुद एक दोस्त बनकर खड़ी हो।

राहों पर गूंजेगा सुरक्षा का संदेश

अब हर ऑटो, हर बस, हर चौक-चौराहे पर पुलिस हेल्पलाइन नंबर चमकेगा, ताकि किसी भी लड़की की चीख, किसी भी मां की पुकार अनसुनी न रहे। हेल्पलाइन नंबर की पहुंच बढ़ाकर पुलिस ने भरोसे का एक और दीपक जला दिया है। हर जिले की महिला थानेदार और निर्भया शक्ति दल खुद महिलाओं से मिलेंगी, उनकी कहानियां सुनेंगी, उनके दर्द को महसूस करेंगी और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई भी करेंगी। कोई भी शिकायत अब फाइलों में दबकर नहीं रह जायेगी, हर समस्या का समाधान निकलेगा।

न्याय की चौखट तक हर पीड़िता को पहुंचना होगा आसान

महिलाओं के लिये मुआवजे की प्रक्रिया अब और तेज होगी, ताकि उनका दुख सिर्फ फाइलों में दर्ज न रह जाये, बल्कि उन्हें हक भी मिले और इन्साफ भी। हर लंबित केस की समीक्षा होगी और गुनहगारों को उनके अंजाम तक पहुंचाने की कार्रवाई और तेज की जायेगी। तकनीक के इस दौर में अब अपराधियों के लिये छुपना मुश्किल होगा। वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीक से अपराधियों को सख्त सजा दिलाने की दिशा में पुलिस ने मजबूत कदम बढ़ाया है। हर केस की बारीकी से जांच होगी, और हर दोषी कानून की पकड़ में आयेगा।

आखिरी उम्मीद—पुलिस की संजीवनी

झारखंड पुलिस ने आज फिर साबित कर दिया कि वो सिर्फ एक व्यवस्था नहीं, बल्कि हर मां की दुआ, हर बेटी की हिफाजत और हर मासूम के सपनों की रखवाली करने वाली एक ताकत है। ये कदम सिर्फ कागज़ी वादे नहीं, बल्कि उन सभी डरती आंखों के लिए एक रोशनी है, जिन्होंने अब तक सिर्फ अंधेरे देखे थे। अब, जब किसी गली में कोई लड़की अकेली चलेगी, तो वो निडर होगी। जब कोई बच्चा स्कूल जायेगा, तो उसका भरोसा अडिग होगा। क्योंकि अब झारखंड पुलिस उनके साथ खड़ी है—एक ढाल की तरह, एक पहरेदार की तरह।

 

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