Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा की धरती पर इन दिनों एक अनकही कहानी तैर रही है। एक ऐसी कहानी, जिसमें विकास की आड़ में धांधली का खेल खेला गया। पात्र थे ग्राम सेवक, अभियंता, सचिव और कुछ वो चेहरे जो जनता की मेहनत की गाढ़ी कमाई से खेल गये।धुरकी और रमकंडा में मनरेगा की डोभा और कूप निर्माण योजनाओं की आड़ में जो हुआ, वो किसी थ्रिलर से कम नहीं। सलीम, समीर और तौफिक के खेतों में जेसीबी मशीनें गरज उठीं, जबकि नियम साफ कहते हैं, “हाथ से काम हो” फिर भी मशीनें चलीं और साथ में चलीं भ्रष्टाचार की रेखाएं।
DC दिनेश कुमार यादव ने जब यह खेल पकड़ा, तो कलम ऐसी चली कि 14 कर्मियों की किस्मत बदल गई। 6 को सीधा बाहर का रास्ता दिखाया गया, 6 को नई जगह भेजा गया, एक निलंबित हुआ और एक पर FIR का फरमान जारी हुआ। धुरकी में जिनकी नौकरी पर बिजली गिरी उनमें दो ग्राम रोजगार सेवक, तीन कनीय अभियंता और एक लेखापाल शामिल हैं। प्रखंड पदाधिकारी से लेकर अभियंता तक को इधर से उधर किया गया।
वहीं रमकंडा में एक डोभा दो किलोमीटर दूर जाकर किसी और खेत में बन गया और लागत तीन गुनी! सवाल वही – क्या यह ग़लती थी, या चालाकी? जवाब मांगे गए, लेकिन जबाव संतोषजनक नहीं थे। और कहानी का अंत साफ है अब नियमों की किताब खुलेगी, जवाबदेही तय होगी और जो खेल चल रहा था, उस पर अब पर्दा गिर चुका है। जिला प्रशासन ने दो टूक कहा है जनता की योजनाओं से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं। अब कोई बच नहीं पायेगा।






