कोडरमा : बुढ़ापे की लाठी समझकर नि:संतान बालमती देवी अपनी बहन के बेटे को बचपन में ही गोद लिया। मां यशोदा की तरह पाला पोसा और पढ़ाकर बड़ा किया। बहुत प्यार करती थी बालमती अपने इस बेटे को। बेटा की बाहर नौकरी लग गई। बेटा दिलीप सिंह अपनी मां को अपनी पत्नी के साथ छोड़ कर चला गया कमाने परदेस। बालमती अपनी बहू रेखा के साथ कोडरमा के नवलशाही गांव में रहती थी। गांव के लोगों ने जब बालमती को नहीं देखा तो बीते बुधवार को उसके घर के आंगन में झांका। सबकुछ सुना-सुना था। तब कुछ लोग बालमती के कमरे की खिड़की से अंदर ताका। लोग दंग और सन्न रह गए। लगभग 63 साल की बालमती मरी पड़ी थी।
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पुलिस तक सूचना गई। आसपास के पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि सास-बहू में 36 का आंकड़ा था। इसके पीछे का कारण यह था कि बालमती के पास 8-10 लाख रुपये थे, जो बैंक में जमा थे। इन्हीं पैसों की खातिर सास-बहू के बीच झगड़ा होते रहता था। जिस रात बालमती का खतरनाक अंत हुआ उस रात रेखा के दो भाई बबलू सिंह और विक्रम सिंह एवं पिता महेंद्र सिंह आए हुए थे। वहीं दिल्ली में रहने वाला बेटा दिलीप सिंह और बहू रेखा के मोबाइल फोन के सीडीआर यह खुलासा करेगा कि बेटा भी इस महापाप से अनजान नहीं था। पूरा गांव बेटा-बहू को कोस रहा है। लोग चाहते हैं कि पुलिस बालमती की मौत के जिम्मेवार लोगों को न छोड़े।
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पुलिस की कार्यशैली से दुखी लोग आज कोडरमा की विधायक डॉ नीरा यादव से जाकर मिले। विधायक को बताया गया कि मृतका बालमती के बदन पर कई जख्मों के निशान मिले हैं। कमर के पीछे का हिस्सा और जांघ जला हुआ था। पेट से सीना तक चोट के निशान थे। हाथ की दोनों कलाई टूटे हुए थे। मुंह और पैर की अंगुली भी चोटिल थी। पुलिस को जैसी कार्रवाई करनी चाहिए वैसा कुछ दिख नहीं रहा। एमएलए से कठोर कार्रवाई की मांग की गई। उधर पुलिस का कहना है पोस्टमार्टम रिपोर्ट का उन्हें इंतजार है।




