UP : फाल्गुन की दस्तक से पहले ही उस घर में शहनाइयों की गूंज थी। आंगन में रिश्तेदारों की चहल-पहल, दीवारों पर टंगे रंगीन कार्ड, और आंखों में बेटी की विदाई के सपने… लेकिन किस्मत ने जैसे अचानक करवट ले ली। यूपी के महोबा के ज्योरइया गांव में 45 साल के किसान कृष्णपाल सिंह ने अपनी ही जिंदगी की डोर काट दी। वो भी बेटी की शादी से महज 11 दिन पहले। 24 फरवरी को बारात आनी थी। घर में खुशियों का सामान जुटाया जा रहा था, मगर जेब की खालीपन ने दिल को तोड़ दिया।
कहते हैं, बीती रात वह चुपचाप घर से निकले। खेत की मेड़ पर खड़ा वह पेड़ शायद उनके मन का साक्षी बना। रस्सी का फंदा झूला नहीं, एक पिता की टूटी उम्मीदों का प्रतीक बन गया। सुबह जब परिजनों ने खेत में लटका शव देखा, तो शहनाइयों की जगह चीखों ने ले ली। पत्नी की आंखों में एक ही सवाल,क्या बेटी की शादी इतनी भारी थी कि एक बाप की सांसें ही छीन लीं? पुलिस जांच की बात कर रही है, कागजों पर कारण दर्ज होंगे… लेकिन उस घर की दीवारें जानती हैं कि यह मौत सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, सपनों की भी थी। अब उस आंगन में 24 फरवरी की तारीख हमेशा एक खाली कुर्सी की तरह चुभती रहेगी।












