UP : प्रयागराज की नींद तब भी गहरी थी, मगर तेजस राजधानी एक्सप्रेस की रफ्तार नींद नहीं जानती। बीती रात भीरपुर और मेजा रोड स्टेशन के बीच, जहां पटरियों की हर इंच सटीकता मांगती है, वहीं मौत बिछाई जा रही थी। गिट्टियों और बोल्डरों की एक दीवार बना दी गई थी, यह ट्रेन को पटरी से नीचे लुढ़काने की चाल थी। मगर लोको पायलट अविनाश की आंखों ने देखा, ट्रैक पर कुछ अजीब है। उसने धीरे से ब्रेक खींचा। पहियों ने चिल्लाकर कहा, “कुछ गड़बड़ है!” सिर्फ 10 मिनट और कई जिंदगी का फैसला हो गया। जैसे ही खबर छिवकी पहुंची, आरपीएफ और रेलवे महकमा हड़बड़ाकर मौके पर पहुंचा। हर मोबाइल पर एक ही कॉल गूंज रही थी, “बोल्डर है ट्रैक पर, तेजस एक्सप्रेस बाल-बाल बची है।” फोटोग्राफी हुई, नोट तैयार हुये और जांच शुरू हो गई। लोको पायलट का बयान, फोटो और लोकेशन के आधार पर संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट दर्ज की गई।
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