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“कॉफी विद SDM” बना गौसेवा का मंथन स्थल

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Garhwa(Nityanand Dubey) : सूरज की नरम किरणों में जब गढ़वा की सुबह मुस्कुरा रही थी, तब शहर के दिल में एक ऐसी बैठक चल रही थी, जहां शब्दों में नीतियां थीं और आंखों में संवेदनायें। यह कोई आम बैठक नहीं थी, यह थी “कॉफ़ी विद एसडीएम”, जहां कॉफी की खुशबू में घुली थी गौसेवा की गंभीरता। SDO संजय कुमार, जिनकी आंखों में प्रशासनिक दृढ़ता और दिल में जनभावना की धड़कन है, आज गोपालकों और गौशाला समितियों के साथ बैठकर कुछ ऐसा बुन रहे थे जो सिर्फ सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि समाज के आत्मिक ताने-बाने को जोड़ने वाला था।

अनदेखी में खोती गई

बैठक की शुरुआत हुई श्रीकृष्ण गौशाला के अद्यतन पंजीकरण पर विमर्श से। विनोद पाठक की आवाज में वर्षों की उम्मीद थी और कोषाध्यक्ष घनश्याम प्रसाद की बातों में वो कसक, जो तब आती है जब आस्था की जमीन पर अतिक्रमण के पत्थर गड़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि गौशाला के नाम 20 एकड़ भूमि है, पर जमीनी हकीकत यह है कि कई हिस्सों पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। SDO ने जिस आत्मीयता से सीमांकन कराकर पहला कदम बढ़ाया, उसी से लोगों को भरोसा हुआ कि अब शायद गायों के लिये भी न्याय का सूरज उगेगा।

जब लावारिस नहीं रहे ‘बेसहारा

SDO का साफ आदेश था, “शहर में कोई गाय लावारिस नहीं रहेगी।” टैगिंग का काम होगा, कांजी हाउस बनेगा, और हर गाय की पहचान, उसकी देखरेख का इंतजाम प्रशासन करेगा। बैठक में जब यह मुद्दा उठा कि लोग पॉलिथीन में खाना फेंकते हैं, जिसे खाकर जानवर बीमार पड़ जाते हैं, तो कमरा कुछ देर के लिए शांत हो गया। शब्द नहीं बोले गये, पर हर चेहरा कुछ सोच रहा था। फिर तय हुआ अभियान चलाया जायेगा, समझाया जायेगा और जरूरत पड़ी तो कार्रवाई भी की जायेगी। क्योंकि बेजुबानों की मौत पर चुप रह जाना, इंसानियत से गुनाह जैसा है।

नवलेश धर दुबे ने जब “गोकुल ग्राम योजना” की बात की, तो वह सपना सामने आया जो साल 2005 में बुना गया था, लेकिन 20 साल बाद भी जमीन पर नहीं उतर पाया। SDO ने ठान लिया, अब निरीक्षण होगा, रिपोर्ट बनेगी और वह सपना नींद में नहीं, जमीन पर चलेगा।

एक नई सुबह की दस्तक

बैठक में हर चेहरा उम्मीद लिए बैठा था, विनोद पाठक से लेकर शुभम केसरी तक, सबके पास कुछ कहने को था।
और यह कोई शिकायत की कतार नहीं थी, यह उस समाज की तस्वीर थी जो अपनी जिम्मेदारी समझता है, लेकिन जरा सा साथ चाहता है। SDO ने भरोसा दिया, “गढ़वा को हम गोवंश संरक्षण का आदर्श जिला बनायेंगे।”

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