CM हेमंत सोरेन ने बकाया और जमीन वापसी पर दिया जोर…

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Ranchi : CM हेमंत सोरेन और केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी की मौजूदगी में आज हाई लेवल मीटिंग हुई। इस मीटिंग में कोयला मंत्रालय और कोल इंडिया और इसकी अनुषंगी इकाइयों के अधिकारियों के बीच कोयला खनन से जुड़े विभिन्न विषयों, मुद्दों तथा उसके समाधान को लेकर पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में हुई इस मीटिंग में CM हेमंत सोरेन ने कहा कि कोयला एक ऐसा विषय है, जिसके तहत इसके खनन, उत्पादन, परिवहन, जमीन अधिग्रहण मुआवजा, विस्थापन के साथ डीएमएफटी फंड एवं सीएसआर एक्टिविटीज को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने के लिये केंद्र और राज्य सरकार को मिलजुल काम करने पर जोर दिया। इससे कोल माइनिंग से संबंधित समस्याओं का जहां समाधान निकलेगा, वहीं लोगों के बीच माइनिंग को लेकर जो नकारात्मक मानसिकता बनती है उसे बदलने में भी सहूलियत होगी। इससे लोगों की उम्मीदें भी जागेगी और कोल परियोजनाओं को लेकर जो समस्याएं उत्पन्न होती है, उसको काफी हद तक रोका जा सकता है ।

CM हेमंत सोरेन ने खनिज रॉयल्टी के 1लाख 36 हजार करोड़ रुपये के बकाये भुगतान की मांग रखी। वहीं, केंद्रीय कोयला मंत्री ने इस मामले के समाधान की दिशा में पहल करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि विस्थापित रैयतों को खनन परियोजनाओं में स्टेक होल्डर बनाकर आगे बढ़ने की जरूरत है। वहीं, खनन परियोजनाओं में छोटे कार्यों के टेंडर विस्थापितों और स्थानीय लोगों को मिले। बंद पड़े खदानों की जमीन राज्य सरकार को वापस करने पर जोर दिया गया।

विस्थापित होने वाले रैयतों को स्टेक होल्डर बनाने पर दिया जोर

CM हेमंत सोरेन ने कहा कि कोल खनन परियोजनाओं को लेकर जमीन का जो अधिग्रहण होता है। जो रैयत विस्थापित होते हैं, उन्हें सिर्फ मुआवजा और नौकरी देने की व्यवस्था से हमें आगे बढ़ाने की जरूरत है। विस्थापित रैयतों को खनन परियोजनाओं में स्टेक होल्डर बनाकर हमें आगे बढ़ने की जरूरत है। इससे उनका हम विश्वास भी जीतेंगे और सीएसआर से जुड़ी गतिविधियों तथा डीएमएफटी फंड का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सकेंगे।

जमीन से लोगों का भावनात्मक लगाव होता है, उसका पूरा ख्याल रखने की जरूरत

CM हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड जैसे राज्य में जमीन से लोगों का भावनात्मक लगाव होता है। ऐसे में जब खनन परियोजनाओं को लेकर जमीन अधिग्रहण होता है तो लोगों को काफी तकलीफें होती है। वे अपनी जमीन से अलग होना नहीं चाहते हैं। विस्थापितों को सिर्फ मुआवजा तथा नौकरी देकर सारी खुशियां नहीं दे सकते हैं। ऐसे में जमीन अधिग्रहण से जो रैयत विस्थापित होते हैं उनकी कोल खनन परियोजनाओं में इस तरह भागीदारी सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि वे अपना पूरा सहयोग सरकार और कोयला कंपनियों को दे सकें।

जमीन राज्य सरकार को वापस किया जाये

CM हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य में ऐसी कई कोल परियोजनाएं हैं, जहां खनन का कार्य पूरा हो चुका है और कोल कंपनियों के द्वारा उस जमीन को यूं ही छोड़ दिया गया है। वह जमीन ना तो राज्य सरकार को हस्तांतरित की जा रही है और ना ही उसका कोई इस्तेमाल हो रहा है। इस वजह से बंद हो चुकी कोल खनन परियोजनाओं में अवैध माइनिंग हो रही है, जिस वजह से कई घटनाएं भी हो चुकी हैं। ऐसे में बंद पड़े खदानों की जमीन राज्य सरकार को वापस किया जाये।

सीएसआर एक्टिविटीज का दायरा बढ़ाया जाये

CM हेमंत सोरेन ने कोल कंपनियों के द्वारा कोयला खनन क्षेत्र में चल रहे सीएसआर एक्टिविटीज और डीएमएफटी फंड के इस्तेमाल की जानकारी ली। कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में कोल कंपनियों के द्वारा कोल खनन क्षेत्र के 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांव या इलाके में सीएसआर एक्टिविटी संचालित की जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएसआर एक्टिविटीज का दायरा और बढ़ना चाहिए। कोयला खनन परियोजनाओं के कम से कम 50 किलोमीटर के रेडियस में सीएसआर एक्टिविटीज के तहत क्षेत्र के विकास से जुड़ी योजनाओं को लागू किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसका फायदा पहुंच सके।

खनन से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को कम करने की जरूरत पर दिया जोर

CM हेमंत सोरेन ने कहा कि खनिजों का जिस तरह से खनन हो रहा है उससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा है। इस दिशा में गंभीरता से सोच कर कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि झरिया में जमीन के नीचे वर्षों से आग लगी हुई है, लेकिन उस पर अभी तक नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। वही घाटशिला में जादूगोड़ा में यूरेनियम के खनन की वजह से लोगों के समक्ष स्वास्थ्य से जुड़ी कई गंभीर समस्याएं आ रही है। इसका निदान होना चाहिये। कोयला मंत्री ने मुख्यमंत्री को भरोसा दिलाया कि कोयला खदानों के नीचे लगी आग को बुझाने और खनन से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के मामले में केंद्र सरकार आवश्यक कदम उठायेगी।

हाई लेवल मीटिंग में मुख्य सचिव अलका तिवारी, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, केंद्रीय कोयला सचिव विक्रम देव, एडिशनल सेक्रेटरी विस्मिता तेज, राज्य सरकार में सचिव अबू बकर सिद्दीक, प्रशांत कुमार, चंद्रशेखर, जितेंद्र सिंह, उमाशंकर सिंह, निदेशक खनन राहुल कुमार सिन्हा, प्रमंडलीय आयुक्त अंजनी कुमार मिश्रा, कोल इंडिया के अध्यक्ष पीएम प्रसाद, सीसीएल के सीएमडी निलेन्दु कुमार सिंह, बीसीसीएल के सीएमडी एस दत्ता, ईसीएल के सीएमडी सतीश झा, सीएमपीडीआई के CMD मनोज कुमार, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के CMD घनश्याम शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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