kohramlive: महाराष्ट्र दारापुर की मिट्टी में जन्मे बेटे ने जब देश की सबसे बड़ी कुर्सी, भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद पाया, तो पूरे गांव का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। मगर असल चमक तब दिखी जब CJI भूषण रामकृष्ण गवई ने ऐलान कर दिया कि वे सेवानिवृत्ति के बाद कोई सरकारी पद नहीं लेंगे। “न पद का लोभ, न सत्ता की प्यास। उन्होंने कहा “मैं गांव, किताबें और सादगी में लौटूंगा।” ये शब्द थे उस शख्स के, जिसने न्याय के मंदिर में वर्षों तक मशाल थामी। उन्होंने अपने पिता, पूर्व राज्यपाल आरएस गवई की पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि अर्पित की, गांव में भावुक कार्यक्रम में शामिल हुये और कहा “अब समय है अपने गांव के लिए कुछ करने का।” उन्होंने दरियापुर में न्यायालय भवन का उद्घाटन किया, ई-लाइब्रेरी को समर्पित किया और अपने पिता के नाम पर बन रहे भव्य द्वार की नींव रखी। नवंबर में उनका कार्यकाल पूरा होगा।
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