Ranchi : झारखंड में बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया लंबे समय से लटकी हुई है। इससे न सिर्फ सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि अवैध खनन और कालाबाजारी भी बढ़ रही है। झारखंड की मुख्य सचिव अलका तिवारी ने सभी DC को निर्देश दिया है कि सितंबर के पहले पखवारे तक व्यावसायिक बालू घाटों की नीलामी पूरी कर लें। नीलामी से पहले नई बालू नीति को अच्छे से समझें। तकनीकी समस्यायें न आयें, इसके लिए DC और खनन पदाधिकारी खुद प्रशिक्षित हों। मॉक ड्रिल और हेल्पलाइन सिस्टम भी तैयार रखें। 15 अक्टूबर से ग्रीन ट्रिब्यूनल का प्रतिबंध हटेगा, उसके पहले नीलामी हो जाने से खनन समय पर शुरू हो पायेगा। इसका फायदा यह होगा कि उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर बालू उपलब्ध होगा। अवैध कारोबार पर रोक और राजस्व बढ़ेगा, वहीं, पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित होगी।
मुख्य सचिव अलका तिवारी ने कहा कि “नीलामी पारदर्शी होनी चाहिये, ताकि उपभोक्ता को फायदा मिले और अवैध धंधों पर रोक लगे। पूरी तैयारी और समझदारी से आगे बढ़ें।” वहीं, खान सचिव अरवा राजकमल ने कहा कि “उपायुक्त मॉक ड्रिल करें, नीलामी प्रक्रिया में कोई झोल न रहे।” खान निदेशक राहुल सिन्हा ने कहा कि “प्रक्रिया से ठेका लेने वालों को भी पहले से पूरी जानकारी दी जाये।”
कुछ जरूरी बातें एक नजर में
- राज्य में 374 छोटे बालू घाट होंगे (5 हेक्टेयर से कम) – ग्राम सभा के तहत
- 60 बड़े समूह बनाकर बड़े घाटों की नीलामी होगी
- एक व्यक्ति को 1000 हेक्टेयर से अधिक नहीं मिलेगा
- 2 से अधिक समूह का ठेका नहीं मिलेगा
- सरकार बालू का रेट तय नहीं करेगी, लेकिन वैध खनन की सख्त निगरानी होगी
- नियम उल्लंघन पर ठेका रद्द करने का अधिकार DC को मिलेगा








