Kohramlive : कहते हैं, इंसान की असली पहचान उसके पास कितना धन है, इससे नहीं बल्कि उसके व्यवहार से होती है। पद और प्रतिष्ठा कुछ समय के लिये लोगों को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन दिल में जगह वही बना पाता है, जिसकी भाषा में विनम्रता और व्यवहार में सम्मान हो। भारत के महान दार्शनिक, अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने जीवन के ऐसे ही कई पहलुओं पर अपनी नीतियों में गहरी बातें कही हैं। उनकी शिक्षाओं में धन, शिक्षा, रिश्तों, सफलता और व्यवहार से जुड़े कई ऐसे सूत्र मिलते हैं, जो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भी बेहद उपयोगी नजर आते हैं। हर व्यक्ति चाहता है कि परिवार हो, समाज हो या कार्यस्थल, हर जगह उसे सम्मान और भरोसा मिले। लेकिन इसके लिये सिर्फ बड़ी उपलब्धियां हासिल करना ही काफी नहीं। कई बार छोटी-छोटी आदतें ही किसी के व्यक्तित्व को बड़ा बना देती हैं। चाणक्य नीति की तीन ऐसी ही सीख हैं, जो व्यक्ति को सम्मान पाने और अपना व्यक्तित्व मजबूत बनाने की राह दिखाती हैं।
1. ज्ञान को बनायें जिंदगी का साथीः चाणक्य के अनुसार ज्ञान इंसान की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है। लेकिन ज्ञान का मतलब केवल किताबें पढ़ना या बड़ी-बड़ी डिग्रियां हासिल करना नहीं है। जिंदगी खुद एक किताब है। अपने अनुभवों से सीखना, अपनी गलतियों को समझना, अनुभवी लोगों की सलाह सुनना और हर परिस्थिति से कोई न कोई सबक लेना भी ज्ञान का ही हिस्सा है। जो व्यक्ति सीखना कभी बंद नहीं करता, उसकी सोच धीरे-धीरे परिपक्व होती जाती है। मुश्किल वक्त में वह जल्दबाजी के बजाय समझदारी से फैसला लेने की कोशिश करता है। ज्ञान आत्मविश्वास बढ़ाता है और बातचीत में समझ पैदा करता है। शायद यही वजह है कि ज्ञानी व्यक्ति को सम्मान दिलाने के लिये उसे अपना परिचय बार-बार देने की जरूरत नहीं पड़ती।
2. अपनी तारीफ खुद करने से बचेंः अपनी उपलब्धियों पर खुश होना अच्छी बात है, लेकिन हर वक्त अपनी तारीफ करते रहना व्यक्तित्व की चमक कम कर सकता है। चाणक्य नीति आत्मप्रशंसा से बचने की सीख देती है। इंसान को अपनी काबिलियत साबित करने के लिये हर बातचीत में खुद को दूसरों से बेहतर बताने की जरूरत नहीं। काम ऐसा कीजिये कि आपकी उपलब्धियां खुद आपकी कहानी कहें। सफलता पर गर्व कीजिये, लेकिन विनम्रता का दामन मत छोड़िये। जब आपकी खूबियां दूसरे लोग पहचानकर आपकी तारीफ करते हैं, तो उस प्रशंसा की कीमत कहीं ज्यादा होती है। याद रखिये जो व्यक्ति खुद को बड़ा बताता है, लोग शायद सुन लें, लेकिन जो अपने काम से बड़ा बनता है, लोग उसे याद रखते हैं।
3. सम्मान चाहिये तो पहले सम्मान देना सीखेंः सम्मान की सबसे खूबसूरत बात यही है कि इसे पाने का रास्ता दूसरों को सम्मान देने से होकर गुजरता है। किसी व्यक्ति का पद क्या है, उसकी आर्थिक स्थिति कैसी है या समाज में उसकी हैसियत कितनी है, इन सबके आधार पर व्यवहार बदलना अच्छे चरित्र की निशानी नहीं है। परिवार हो या दोस्त, सहकर्मी हों या समाज के दूसरे लोग, मीठी भाषा और शालीन व्यवहार रिश्तों में ऐसी गर्माहट पैदा करते हैं, जो किसी धन-दौलत से नहीं खरीदी जा सकती। छोटे-बड़े का भेद किये बिना सम्मान देना व्यक्ति के संस्कार और चरित्र को सामने लाता है। जो दूसरों को महत्व देता है, वह खुद भी लोगों के दिल में महत्व हासिल कर लेता है। चाणक्य की इन तीन सीखों को सरल शब्दों में कहें तो सीखते रहिये, अपनी तारीफ से बचिये और दूसरों को सम्मान दीजिये।







