Kohramlive : CBSE (Central Board of Secondary Education) ने शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। ताकि “डमी स्कूल” की प्रवृत्ति पर लगाम लगे और बच्चे असली पढ़ाई से जुड़ें। यह बदलाव कोचिंग पर बढ़ती निर्भरता को कम करने, स्कूल शिक्षा को मजबूत बनाने एवं समझ, स्किल और प्रैक्टिकल लर्निंग पर जोर देने के लिये किया गया है। ये बदलाव National Education Policy 2020 और National Curriculum Framework 2023 के विजन पर आधारित हैं। CBSE चेयरमेन Rahul Singh के अनुसार, “यह ढांचा अभी विकसित हो रहा है, फीडबैक के आधार पर सुधार होगा।”
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CBSE में सबसे बड़ा बदलाव: तीन भाषा फॉर्मूला
सत्र 2026-27 से छठी में तीसरी भाषा अनिवार्य होगी। 2030-31 तक इसे 10वीं तक लागू किया जायेगा। कम से कम दो भारतीय भाषायें पढ़ना जरूरी होगा। 10वीं बोर्ड में पास करना अनिवार्य होगा।दिव्यांग छात्रों को इसमें छूट दी गई है। वहीं, मैथ्स-Science अब दो स्तर पर होगी। 9वीं से स्टैंडर्ड और एडवांस लेवल, सभी के लिये सामान्य पेपर, एडवांस लेने वालों के लिये 25 अंकों की अतिरिक्त परीक्षा होगी। ये अंक कुल प्रतिशत में नहीं जुड़ेंगे, वहीं, मार्कशीट में अलग योग्यता के रूप में दिखेंगे।
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AI और टेक्नोलॉजी की एंट्री
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग शामिल होगी। 3री–8वीं गतिविधि आधारित पढ़ाई होगी, 2027-28 विषय के रूप में लागू होगा। 2029 में बोर्ड परीक्षा में मूल्यांकन होंगे। वहीं, स्कूलों में “बैगलेस डे” लागू होगा। पढ़ाई का दबाव कम करने के निर्देश दिये जायेंगे। इंटरडिसिप्लिनरी और स्किल बेस्ड लर्निंग पर जोर दिया जायेगा। कला, खेल और स्वास्थ्य भी अब “कोर लर्निंग” का हिस्सा होगा। नया मूल्यांकन सिस्टम लागू होगा। 4 हिस्सों में आंतरिक मूल्यांकन, आवधिक टेस्ट, मल्टीपल असेसमेंट, पोर्टफोलियो, विषय संवर्धन एवं बोर्ड परीक्षा में 50% सवाल केस स्टडी, डेटा और एप्लीकेशन बेस्ड होंगे।




