UP : यूपी के झांसी से आई एक तस्वीर ने सरकार के विकास के दावों को झकझोर दिया है। बंगरा ब्लॉक के खिरक मंजूवारा गांव में एक गर्भवती महिला को अस्पताल तक पहुंचाने के लिये बैलगाड़ी का सहारा लेना पड़ा, क्योंकि गांव तक पहुंचने वाली सड़क आज भी सपने जैसी चीज है। यह वही झांसी है, जिसकी रानी ने आजादी के लिये तलवार उठाई थी, लेकिन आज यहां एक मां को जीवन देने के लिये कीचड़, दलदल और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से जूझना पड़ा। गांव के निवासी चंद्रभान कुशवाहा की पत्नी सोमवती को रविवार सुबह प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार ने एंबुलेंस बुलाई, लेकिन रास्ता इतना खराब था कि गाड़ी गांव से तीन किलोमीटर पहले ही रुक गई। तब गांववालों ने बैलगाड़ी निकाली, चारों ओर से उसे थामा और कच्चे रास्तों से झकझोरते हुये, कीचड़ में फंसते-उबरते, किसी तरह महिला को एंबुलेंस तक पहुंचाया। सोमवती को अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। लेकिन वापसी पर फिर वही मुसीबत सड़क नहीं, सिर्फ उम्मीद और बैलगाड़ी।
खिरक मंजूवारा गांव की आबादी करीब 1,500 है। यहां आज भी न पक्की सड़क है, न जल निकासी की व्यवस्था। बारिश में ये रास्ते दलदल बन जाते हैं, जहां पैर उठाना भी पहाड़ चढ़ने जैसा कठिन होता है। एक ग्रामीण ने कहा कि “हर चुनाव में सड़क बनाने का वादा होता है, लेकिन वोट खत्म होते ही नेता गायब हो जाते हैं। अब तो बैलगाड़ी ही हमारी एंबुलेंस है।” घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। लोग लिख रहे हैं “जहां बैलगाड़ी पर बच्ची का जन्म होता है, वहां विकास अब भी रास्ता ढूंढ रहा है।” हालांकि वायरल वीडियो की पुष्टि Kohramlive.com नहीं करता है।
Jhansi… pic.twitter.com/Z64KDa4nFw
— News1India (@News1IndiaTweet) November 3, 2025






